इंसान की रहनुमाई के लिये अल्लाह ने नबियों को भेजा

 
इंसान की रहनुमाई के लिये अल्लाह ने नबियों को भेजारायबरेली।  नई नसलों को अल्लाह वालों की जिन्दगियों से आसना कराया जाये। सैयद अमीरूद्दीन गाजीपुरी। बतारीख 19 दिसम्बर बरोज बुध बाद नमाज़े इशा मदरसा दारूल उलूम गुलशने मीना आजाद नगर में जश्ने गौसुल वरा आखरी प्रोग्राम हजऱत सूफी साजिद अली हबीबी की सदारत में सम्पन्न हुआ।

निज़ामत के फराइज मौलाना फिरोज सलवनी ने की। तिलावत कुरान पाक से जलसे का आगाज़ कारी उसमान जीई की तिलावत से शुरू हुआ। नातों मनकबत में हाफिज सद्दाम फतेहपुरी हाफिज़ मो 0 इलियास, कामिल रायबरेली ने पेश की।

मुख्य वक्ता हजऱत मौलाना सयद अमीरूद्दीन गाजीपुरी ने फरमाया, कि अहले अल्लाह की पाकीज़ा महफिल व मजलिस आज भी बनदागाने खुदा के अजबान व कुलूब को नूरइमा से मुनव्वर करने और इमान व अकीदा में जिला बख्शने में अहम किरदार अदा करती है। आज जब की इस्लामी मुआसिरा इस्लाम की इन्केलाब खूबसूरत तारिख अल्लाह वालों के हयातों खिदमत के रौशन गोसों से उम्मते मुसलिमा को बताया जाये। मौलाना ने कहा कि अवलिया एकराम ने अपने जमाने में वाजो नसीहत से सासाइटी की बुराईयों को भलाइयों में बदल दिया। दारूल उलूम गुलशने मदीना की जानिब से 11 रोजह प्रोग्राम की सरहाना करते हुए कहा कि अहले सुन्नत के प्लेटफार्म से किये जाने वाले दीनी व मज़हबी मसलकी रूहानी और तालिमी कारनामे वक्त की अहम जरूरत है।
इससे पहले मौलाना अंसार मिसबाही ने कहा कि दुनिया में इंसान की हिदायत व रहनुमाई के लिये अल्लाह ने नबियों को भेजा जिन्होंने कुफ्र व शिर्क में डूबी हुई औलादें आदम को इमानों यकीन की दौलत से माला माल किया। मौलाना ने कहा कि इस तरीके को बरकरार रखने के लिये हर दौर में इन अल्लाह वालों ने अहम किरदार अदा किया मजहबे इस्लाम की तबलीग व प्रचार प्रसार में वो अहम खिद्मात अज़ाम दिया जिसकी मिसाल दुनिया पेश करने से आजिज़ है।

मौलाना आमिर रज़ा ने मेहमानों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि फराइजों वाजिबात सुन्नतों नवाफिल की वक्त पर अदायेगी के साथ-साथ बुजुर्गों के अवरादों बाजाइक को भी मामूलाते जिन्दगी के शामिल करने की अपील की।   इस मौके पर अरशद हबीबी, मास्टर फरीदी, मास्टर शब्बीर, बासीर खां, हाजी यूनुस, जब्बार ठेकेदार, हाफिज मो 0 मोबीन, हाफिज़ समीर, मौलाना इज़हार, नसीम उर्फ पप्पू, वसीम भाई, मज्जन राईनी, शादाब, मौलाना कासिम, इसराइल अमज़दी, मौलाना शमीम, इस्लाम राईनी, राशिद भाई, इरफान अपना ग्लास, मुस्ताक घोसी व हजारों की तादाद में लोग मौजूद रहे। बाद सलातों सलाम के सूफी साजिद अली हबीबी की दुआ पर जलसा खत्म हुआ।

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