योगी राज में दंगा न होने का दावा सरासर झूठ : रिहाई मंच

 
योगी राज में दंगा न होने का दावा सरासर झूठ : रिहाई मंचलखनऊ। रिहाई मंच ने यूपी में हुई पुलिसिया मुठभेड़ों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर कड़ी आपत्ति दर्ज करते हुए इसे चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन कहा। मुठभेड़ में मारे गए लोग गुंडे थे या नहीं यह तो अदालत तय करेगी लेकिन गुंडों की जगह जेल या उनका जय श्री राम बोलने वाले योगी की भाषा विषुद्ध गुंडों-अपराधियों की भाषा है।

रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने पूछा कि योगी जिनपर हेट स्पीच से लेकर हत्या, दंगा भड़काने के मुकदमे दर्ज हैं वो किस मुहं से यूपी को गुंडाराज मुक्त प्रदेश कह रहे हैं। यूपी में हुई मुठभेड़ों पर मानवाधिकार आयोग जांच कर रहा है तो मामला सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है कि क्या उनकी हत्या की गई है। गुंडे या तो जेल में हैं या ऊपर पहुँच चुके हैं बोलने वाले योगी को यह भी बताना चाहिए कि मुठभेड़ों में मारे गए लोग किन जातियों के थे। उन्होंने पूछा कि क्या सिर्फ दलित, पिछड़ा, मुसलमान ही अपराधी है जो उन्हें चुन-चुनकर गोली मारी गई।

प्रदेश सरकार की इस नीति पर संयुक्त राष्ट्रसंघ तक ने सवाल किया है। योगी बोलते हैं कि उनके राज में दंगे नहीं हुए तो वे बताएं कि बलिया के सिकंदरपुर में भाजपा विधायक संजय यादव खुलेआम दुकानों को लुटवाते हैं वहीं बुलंदशहर में योगेश राज जैसे लोग इंस्पेक्टर की हत्या कर देते हैं, यह दंगा नहीं तो क्या था। कासंगज से लेकर बाराबंकी, बहराइच, आजमगढ़, कानपुर तक में सांप्रदायिक तनावों के नाम पर मुस्लिम समुदाय को रासुका लगाकर क्यों जेल में सड़ाया जा रहा है।

रिहाई मंच अध्यक्ष ने कहा कि योगी का जिन मामलों में नाम सामने आया उसके आरोपी असीमानंद ने कोर्ट में 164 में बयान देते हुए उन धमाकों में अपना हाथ होना स्वीकारा था। समझौता, मालेगांव, मक्का मस्जिद, अजमेर दरगाह धमाकों के स्वीकारोक्ति वाला पत्र राष्ट्रपति और अन्य को भेजा था। जहां अपना गुनाह कबूलने के बाद भी कोई बाइज्जत बरी कर दिया जाता हो तो इस देश की कानून व्यवस्था को क्या कहा जाए। जांच एजेंसियां एक तरफ चार्जशीट फाइल करती हैं दूसरी तरफ गवाहों पर दबाव डालकर बयान बदलवा देती हैं। यह सब सत्ता के दबाव में चल रहा है।

रिहाई मंच नेता राबिन वर्मा ने कहा कि होली की रात सांप्रदायिक लोगों ने सोनभद्र के परसोई गांव में अनवर नाम के व्यक्ति की लाठी-डंड़ों, फावड़ा-कुल्हाड़ी से जान ले ली। पूरा मामला चार-पांच महीने से चल रहा था। आरोपी रवीन्द्र खरवार सरकारी अध्यापक हैं और जूनियर हाई स्कूल में संघ की शाखा लगाते थे। गांव के जिस इमाम चैक में 10-15 सालों से हिंदू-मुसलमान साथ में ताजियां रखते आए हैं उसे वे तोड़कर संघ की शाखा लगाने के लिए इस्तेमाल करना चाहते थे। 20 मार्च को रात साढ़े 9 बजे के करीब जब वे इमाम चैक तोड़ रहे थे तो अनवर ने उन्हें टोका और इसी बात पर हमलावरों ने पीट-पीटकर उन्हें मार डाला। अनवर के बेटे का कहना है कि पहले भी इस मामले की पुलिस से शिकायत की गई थी पर उसे सुना नहीं गया और यह घटना हो गई।

रिहाई मंच नेता ने कहा कि पूरा कैबिनेट जब कुंभ नहा रहा था तो इलाहाबाद में बच्चियों के साथ बलात्कार हुआ। राजधानी के माल ब्लाक में मजदूरी मांगने पर सामतों ने मजदूर को कार से रौंदकर मार डाला। वहीं गाजियाबाद में मंदिर से निकल रहे युवक-युवती की हत्या कर दी गई। इससे पता चलता है कि अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं और उनकी पीठ पर किस कदर सत्ता का हाथ है। 

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