आखिर ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल को किस रास्ते पर ले जा रही हैं?

 
आखिर ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल को किस रास्ते पर ले जा रही हैं?
एसपी मित्तल 
10 जून की रात को भी पश्चिम बंगाल के चौबीस परगना क्षेत्र में बम धमाके हुए। इन धमाकों में तीन लोगों की मौत हो गई। बंगाल में रोजाना हिंसा हो रही है। टीएमसी की सरकार चलाने वाली ममता बनर्जी का कानून व्यवस्था पर कोई नियंत्रण नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है कि गुंडातत्व सरकार पर हावी हो गए हैं और अब ममता सरकार लाचार है।

मामला भाजपा के कार्यकर्ताओं की हत्या तक सीमित नहीं है बल्कि आम बंगाली नागरिक भी मौत के घाट उतारा जा रहा है। 11 जून को कोलकाता में समाज सुधारक विद्यासागर कॉलेज के बाहर लगे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बेनर पोस्टर फाड़ दिए गए।

इस घटना से भी कोलकाता में तनाव के हालात है। बंगाल के नागरिकों ने लोकसभा चुनाव में भाजपा को 18 सीटे इसलिए दिलवाई ताकि बंगाल के आम नागरिक की सुरक्षा हो सके। चुनाव के दौरान नरेन्द्र मोदी और अमितशाह ने वायदा किया था कि बंगाल को सरकारी आतंक से मुक्ति दिलवाएंगे। मोदी और शाह का भी यह कहना रहा कि हिंसा और अपराध की घटनाएं सरकार के संरक्षण में हो रही है।

अब मोदी ने दोबारा प्रधानमंत्री और अमितशाह ने केन्द्रीय गृह मंत्री पद की शपथ ले ली है, लेकिन अभी तक भी बंगाल के लोगों को राहत नहीं मिल पाई है। राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी की रिपोर्ट मिलने के बाद दस जून को केन्द्र ने जो एडवाइजरी जारी की उसे मुख्यमंत्री बनर्जी ने खारिज कर दिया है। ममता पहले ही कह चुकी है कि वह नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री नहीं मानती है। एक तरफ बंगाल में लगातार हिंसा हो रही है तो दूसरी ओर ममता बनर्जी केन्द्र सरकार के कोई दिशा निर्देश नहीं मान रही हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि केन्द्र सरकार मूक दर्शक क्यों बनी हुई है? जब बंगाल का आम नागरिक दु:खी और परेशान है तब केन्द्र को दखल देना ही चाहिए। अब समय आ गया है जब बंगाल में कानून व्यवस्था कायम रखने के लिए सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। यदि केन्द्र सरकार विलम्ब करती है तो बंगाल के हालात और बिगड़ेंगे।

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