कांग्रेस के नेता भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने अब NRC का भी किया समर्थन

 
कांग्रेस के नेता भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने अब NRC का भी किया समर्थन
एसपी मित्तल 
16 सितम्बर को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिस तरह असम में नागरिकता पहचान के लिए एनआरसी हुई है, उसी प्रकार उत्तर प्रदेश में भी होनी चाहिए। इस संबंध में वे केन्द्रीय गृहमंत्रालय से आग्रह करेंगे। इससे पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर भी अपने प्रदेश में एनआरसी की मांग कर चुके हैं।

दिल्ली में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी और महाराष्ट्र में सीएम देवेन्द्र फणनवीस भी इसी तरह की मांग कर चुके हैं। हालांकि अभी कांग्रेस शासित राज्य के किसी भी मुख्यमंत्री ने एनआरसी कराने का बयान नहीं दिया है, लेकिन हरियाणा के पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने एनआरसी के पक्ष में अपनी राय व्यक्त की है।

उन्होंने कहा कि विदेशी नागरिकों को देश से बाहर निकाला जाना चाहिए। यहां यह उल्लेखनीय है कि अपनी पार्टी लाइन से हट कर हुड्डा ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने का भी समर्थन किया था। इसमें कोई दो राय नहीं कि भारत में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक रह रहे हैं। पड़ौसी देशों से आए लोगों ने तो आधार कार्ड, पेन कार्ड, राशन कार्ड, आदि पहचान पत्र भी बनवा लिए हैं।

ऐसे विदेश सरकारी सुविधाओं का लाभ भी उठा रहे हैं। इससे उन भारतियों को नुकसान हो रहा है जो वाकई सरकारी सुविधाओं के हक दार हैं। यह माना कि बढ़ती आबादी की वजह से सरकार के संसाधन कम पड़ रहे हैं, लेकिन एक बड़ा कारण घुसपैठ भी है। जब हम अपने देशवासियों को ही पर्याप्त सुविधाएं नहीं दे पा रहे हैं तो फिर घुसपैठियों को कैसे दी जा सकती है? जिस प्रकार असम में एनआरसी हुई है उस पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने ऐतराज जताया है। संघ का कहना है कि असम में विदेशी नागरिकों ने आधार कार्ड, पेन कार्ड, राशन कार्ड आदि बनवाकर एनआरसी की लिस्ट में अपना नाम जुड़वा लिया, अब सरकार को चाहिए कि ऐसे विदेशियों को लिस्ट से बाहर निकालने का काम करे।

उन्होंने कहा कि यदि किसी  विदेशी नागरिक के पास आधार कार्ड जैसी सुविधा है तो इसका मतलब ये नहीं कि वह भारतीय नागरिक हो गया है। संघ का मानना है कि ऐसी समस्या देश भर में है। संघ पहले ही पूरे देश में एनआरसी कराने की मांग कर चुका है। जहां तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सवाल है तो वे एनआरसी के खिलाफ हैं। सवाल उठता है कि कांग्रेस और ममता बनर्जी जैसी मुख्यमंत्री एनआरसी का विरोध क्यों कर रही हैं? क्या ये लोग भारत में विदेशी नागरिकों के रहने के पक्ष में हैं?

सब जानते हैं कि पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में बांग्लादेश के लोगों ने घुसपैठ की है। ऐसे घुसपैठिए अब ममता बनर्जी की टीएमसी में भी शामिल हो गए हैं। बंगाल में ममता की पार्टी की जीत में बहुत बड़ा योगदान ऐसे मतदाताओं का भी है। यदि पश्चिम बंगाल में एनआरसी होती है तो सबसे ज्यादा नुकसान ममता बनर्जी और उनकी टीएमसी को होगा।

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