मुख्यमंत्री योगी के बयान पर कांग्रेस का पलटवार

 
मुख्यमंत्री योगी के बयान पर कांग्रेस का पलटवाररायपुर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता मोहम्मद असलम ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा अंबिकापुर में दिए गए छत्तीसगढ़ की खराब कानून व्यवस्था के बयान पर पलटवार करते हुए कहा है कि भूपेश बघेल की सरकार के संरक्षण में कानून व्यवस्था ना सिर्फ चुस्त-दुरुस्त है अपितु लोग यहां अमन, चैन, सुकून और भाई चारा के साथ रह रहे हैं। छत्तीसगढ़ आकर दागदार दामन की छवि रखने वाले मुख्यमंत्री को अपने गिरेबान  में झांकना चाहिए और यहां उपदेश देने के पहले उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था की फिक्र करनी चाहिए जहां ना महिलाओं की हिफाजत हो रही  है और ना ही आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना है। हत्या के मामले में उत्तरप्रदेश का स्थान पहले नंबर पर है। अपहरण, महिलाओं  व  बच्चों से जुड़े अपराधों के मामले में यूपी ने अन्य राज्यों को काफी पीछे छोड़ दिया है और अपराध नियंत्रण एवं कानून व्यवस्था की स्थिति अत्यंत खस्ताहाल एवं चरमराई हुई हैं।
प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता मोहम्मद असलम ने योगी द्वारा नक्सलवाद और आतंकवाद पर उठाए गए सवाल के जवाब में कहा कि नोट बंदी के पश्चात आतंकवाद पर पूरी तरह से नियंत्रण की बात प्रधानमंत्री मोदी ने कही थी पर उसमें आज तक कमी नहीं आई है। वहीं छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को बढ़ाने का श्रेय छत्तीसगढ़ की तत्कालीन भाजपा सरकार एवं उनके  मुखिया मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को जाता है जिनके 15 वर्षों के कार्यकाल में नक्सलवाद उनके गृह जिला कवर्धा सहित 14 जिलों में विस्तारित हुआ है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तो सुरक्षा बलों को कड़ा निर्देश दिया है कि नक्सलवाद से निपटने के लिए गोली का जवाब गोली से दिया जाए।
प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता मोहम्मद असलम ने यह भी पलटवार किया कि छत्तीसगढ़ की सरकार मौन नहीं है, बल्कि पूरी तरह से जनता की अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर सजग रहते हुए लोक कल्याणकारी कार्यों एवं सकारात्मक कार्यों को अंजाम दे रही है और माफियाओं, चिटफंड कंपनियों के खिलाफ सरकार द्वारा कड़ी कार्रवाई की जा रही है। प्रवक्ता मोहम्मद असलम ने विधायक स्वर्गीय भीमा मंडावी की नक्सली वारदात में हुई दर्दनाक मौत पर दुख जताते हुए कहा कि योगी जी द्वारा भीमा मंडावी की मौत का उल्लेख  करते हुए सवाल   उठाया गया किंतु वर्ष 2013 में डॉ रमन सिंह सरकार के समय कांग्रेस के प्रथम पंक्ति के नेताओं की झीरम घाटी में हुए दुखद मौतों का उल्लेख नहीं किया जाना दुर्भाग्यजनक है। जबकि दोनों ही मामलों के घटनाक्रमों एवं परिस्थितियों में काफी अंतर है।

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