अध्यक्ष पद पर बने रहने के लिए राहुल गांधी के आवास के बाहर फिर जुटे कांग्रेसी

 
अध्यक्ष पद पर बने रहने के लिए राहुल गांधी के आवास के बाहर फिर जुटे कांग्रेसी
एसपी मित्तल 
26 जून को कांग्रेस संसदीय दल की बैठक के मद्देनजर एक बार फिर कांग्रेस के कार्यकर्ता राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के दिल्ली स्थित आवास के बाहर जमा हो गए। कांग्रेस के जो नेता राहुल को अध्यक्ष पद पर बनाए रखना चाहते हैं, उन्होंने ही ऐसी रणनीति बनाई ताकि राहुल पर दबाव डाला जा सके।

26 जून को संसदीय दल की बैठक में जाने के लिए जब राहुल अपने आवास से बाहर निकले तो बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे। कार्यकर्ताओं की भीड़ को देख राहुल गांधी मुस्कुराते हुए एसपीजी के सुरक्षा घेरे से बाहर निकल गए। प्रदर्शन करने वालों में राजस्थान के खेल मंत्री अशोक चांदना और उनके समर्थक भी मौजूद रहे। कांग्रेस के एक बड़े नेता के इशारे पर चांदना अपने समर्थकों के साथ 26 जून को राहुल गांधी के आवास के बाहर एकत्रित हुए थे।

संसदीय दल की बैठक शुरू होते ही सोनिया गांधी को छोड़कर सभी पचास सांसदों ने एक स्वर से आग्रह किया कि राहुल अध्यक्ष पद पर बने रहे। लेकिन अपने संबोधन में राहुल ने दो टूक शब्दों में कहा कि मैंने जो निर्णय ले लिया है उसमें कोई बदलाव नहीं होगा। पार्टी को मेरा विकल्प ढूंढना ही होगा। संसदीय दल की बैठक में राहुल ने जिस तरह अपना स्टैंड  रखा, उससे उन खबरों पर विराम लग गया है कि राहुल गांधी ही राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहेंगे।

असल में पिछले दो दिनों से चर्चा थी कि जिन राज्यों में इसी वर्ष विधानसभा के चुनाव होने हैं उन राज्यों के नेताओं से राहुल मुलाकात करेंगे। लेकिन अब मुलाकात शायद ही हो पाए। मालूम हो कि 26 मई को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में लोकसभा चुनाव की हार की जिम्मेदारी लेते हुए राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि अभी तक इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ है, लेकिन जिस तरह राहुल अपनी जिद पर अड़े हैं उससे प्रतीत होता है कि कांग्रेस को नया अध्यक्ष तलाशना ही होगा।

लेकिन सवाल उठता है कि अध्यक्ष की जिस कुर्सी पर पहले श्रीमती सोनिया गांधी और राहुल गांधी बैठे, उस कुर्सी पर अब कांग्रेस का कौनसा नेता बैठेगा? कांग्रेस में क्या कोई ऐसा नेता है जो राहुल गांधी के बराबर हो? सूत्रों की माने तो श्रीमती सोनिया गांधी ही फिर से अध्यक्ष बन जाएगी।

असल में सोनिया भी नहीं चाहती है कि कांग्रेस को और नुकसान हो। राहुल के इस्तीफे के बाद से राज्यों में भी कांग्रेस संगठन पर कोई नियंत्रण नहीं है। कांग्रेस शासित राज्यों में भी संबंधित मुख्यमंत्री अपने नजरिए से सरकार चला रहे हैं।

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