बच्चों के लिए फरिश्ता बनकर आए डॉ कफील खान, यहां जानिए चमकी बुखार के

 
बच्चों के लिए फरिश्ता बनकर आए डॉ कफील खान, यहां जानिए चमकी बुखार के
अज़हर उमरी, नई दिल्ली। अच्छी ख़बरें आ रही हैं .चमकी बीमारी से ग्रसित होने वाले बच्चों की संख्या तथा मृत्यु दर में कमी आयी हैं. ऐसा विभिन्न समाज सेवी संस्थाओं का गाँव-गाँव में जागरूकता अभियान चलाना , चमकी बीमारी जाँच शिविर लगाना ,डॉक्टर/नर्स की दिन रात की मेहनत तथा वर्षा होना , भीषण गर्मी से राहत से संभव हो सका है.

चमकी बीमारी से बिहार में हुईं 250 से ज़्यादा मौतों से पूरा भारत व्यथित है चमकी बीमारी के कारक का पता नहीं हो पाया है पर इसके लक्षण उत्तर प्रदेश के मस्तिष्क ज्वर जैसे ही हैं अंतर केवल इतना है की उत्तर प्रदेश में मस्तिष्क ज्वर का प्रकोप वर्षा होने पर पाया गया है और बिहार का चमकी  बीमारी अत्यधिक गर्मी में घातक होती है .
बच्चों के लिए फरिश्ता बनकर आए डॉ कफील खान, यहां जानिए चमकी बुखार के

जो प्रमुख कारण उभर कर आयें हैं बीमारी के फैलने के
१-poor personal hygiene
2-poor senitation
3-lack of save drinking water
4-overcrowding /population explosion
5- poor vaccination drive
6 - Malnutrition
7-Extreme Heat & Humid conditions

फ़ैक्ट फ़ाइंडिंग टीम ने मृत्यु को कम करने के प्रयास का भी ख़ुलासा किया .चार मेन point पर हुईं बच्चों की मौत को गड़ना में नहीं जोड़ा जा रहा
1-जिन बच्चा गाँव में झोला छाप / quaks के पास इलाज करते मृत्यु हो जा रही
2-जिन बच्चों की मृत्यु प्राइवट हॉस्पिटल में हो जा रही
3-सरकारी ऐम्ब्युलन्स में गाँव से SKMCH हॉस्पिटल ले जाते समय हो जा रही
4-SKMCH के emergency में जो brought dead बच्चे लाए जा रहे
इनको भी जोड़ ले तो 300 से ज़्यादा बच्चे चमकी बीमारी का शिकार हो चुके हैं
बच्चों के लिए फरिश्ता बनकर आए डॉ कफील खान, यहां जानिए चमकी बुखार के

बिहार का मुआयना करने के बाद कुछ बातें चमकी बीमारी के बारे में समझ आयीं
1-लीची खाने से ही चमकी बीमारी नहीं हो रही और भी कारण हैं क्योंकि बहुत से माता पिता ने बताया कि उन्होंने बच्चें को लीची नहीं खिलायें थी
2- अगर जल्द से जल्द इलाज आरम्भ कर दिया जाए तो चमकी बीमारी का इलाज संभव है
3-बीमारी से ज़्यादा सरकारी अव्यवस्था बच्चों की मृत्यु का कारण है .श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज सरकारी दुर्व्यवस्था का उदाहरण है डॉक्टर /नर्स की कमी है ,ज़रूरी दवाई की क़िल्लत है ,एक एक बेड पर ३-३ मरीज़ों का इलाज चल रहा है ,गंदगी का अंबार है .
बिहार की प्राथमिक चिकित्सा बेहद ख़राब हालत में है .
4-दलित , अल्पसंख्यक , पिछड़ो इलाक़े टिकाकरन से वंचित हैं
5-ग्रामीण इलाक़े में चमकी बीमारी के बारे में जागरूकता में भारी कमी हैं
6-सभी मृत्यु बच्चे कुपोषण से ग्रसित थे
7-अधिकतर बच्चे महादलित ,दलित ,अल्पसंख्यक ,पिछड़े परिवार से थे
8-कन्या ज़ायद इस बीमारी से ग्रसित हुई
9-6 महीने से 5 साल तक के बच्चों की सर्वाधिक मृत्यु हुईं
10- अधिकतर परिवार रोज़ कमाने वाले मज़दूर थे जिनकी प्रतिदिन की आय 125-200 Rs है


डॉक्टर कफ़ील खान मिशन स्माइल फ़ाउंडेशंज़ तथा इंसाफ़ मंच के सौजन्य से 12 दिन में (18/06/19-29/06/19) मुज़फ़्फ़रपुर , चंपारन ,वैशाली , सीतामढ़ी बिहार में 15 से अधिक चमकी बीमारी जाँच शिविर में क़रीब 4600 बच्चों की जाँच कर और उन्हें दवाइयाँ मुफ़्त दी गयी
पेरेंट्स को चमकी बीमारी के लक्षण और बचाव के तरीक़ों से अवगत कराया गया
यह जाँच शिविर दमोदरपुर ,चैनपुर बाँगर ,चकिया पूर्वी चंपारन , नीम चौक ,नथुनी चौक सुमेरा, मेकरी मुर्रा टोला , अली नेउरा ,मीनापूर , डुमरी कटरा ,औराइ  मुज़फ़्फ़रपुर, वैशाली तथा सीतामढ़ी में लगाया गया

11 गाँवों में चौपाल लगा करा चमकी बीमारी के बारे में जानकारी दी गयी सभी परिवारों को बुखार नापने का डिजिटल थर्मामीटर और ORS भी निशुल्क दिया गया .

डाक्टरो की टीम में डाक्टर कफील खान के आलावा डा  एन आजम,डाo आशीष गुप्ता ,डॉक्टर अरशद अंजुम, डॉ अंसारी शामिल थे .इंसाफ मंच बिहार के उपाध्यक्ष जफर आज़म, कामरान रहमानी, दानिश, आफ़ताब साहब , फ़हद भाई , धरामदेव यादव ,चंदन पासवान ,ऐजाज,सोनू तिवारी तथा पिंटू गुप्ता का भी योगदान सराहनीय रहा


चमकी बुखार से बच्चो को बचाने के लिऐ बच्चो को
1- धुप से दुर रखे।
2-अधिक से अधिक पानी का सेवन कराऐ।
3-हलका साधारण खाना खिलाऐ ,बच्चो को जंक फुड से दुर रखे।
4-खाली पेट लिची ना खिलाऐ।
5-रात को खाने के बाद थोरा मिठा ज़रूर खिलाऐ।
6-घर के आसपास पानी जमा न होने दे ।किटनाशक दवाओ का छिरकाओ करे।
7-रात को सोते समय मछर दानी का ईस्तेमाल करे ।
8- पुरे बदन का कपड़ा पेहनाऐ।
9-सड़े गले फल का सेवन ना कराऐ ।ताज़ा फल ही खीलाऐ।
10- बच्चो के शरीर मे पानी की कमी ना होने दें।अधिक से अधिक बच्चो को पानी पीलाऐ ।

लक्षण :-

बच्चो को -
1-अचानक  तेज बुखार आना।
2-हाथ पेर मे अकड़ आना/टाईट हो जाना ।
3-सुस्त पड़ना/ बेहोश हो जाना।
4-बच्चो के शरीर का चमकना/शरिर का कांपना ।
5-शरीर पे चकत्ता निकलना ।
6-गुलकोज़ का शरीर मे कम हो जाना ।
7-व्ययवहार में परिवर्तन
८-आक-बक बात करना/अत्यधिक रोना
९-पिसब /मूत्र में कमी
१०- पीलिया होना


मुख्यतः तीन विन्दु उभरकर सामने आए जिसपर तत्काल पहलकदमी की आवश्यकता है.

१-पूरे वर्ष चमकी बीमारी जागरूकता अभियान चलाना
२- बीमारी के स्रोत पर हमला किया जाना चाहिए. सरकार को इस बात का उपाय करना चाहिए कि दवा का लगातार छिड़काव होता रहे और बीमारी फैलने के सामाजिक कारक जैसे शौच की व्यवस्था, साफ़ पानी की उपलभ्यथा , टिकाकरन अभियान का सही से क्रियावन , कुपोषण को सरकारी आपातकाल घोषित कर बच्चों के पोषण पर ध्यान देना
३-बीमारी के फैलने से पहले ही सरकारी तंत्र को तैयार रहना
४- आईसीयू में बेड संख्या 200 करना: डॉक्टर/नर्स/पैरमेडिकल स्टाफ़ की तैनाती जल्द से जल्द करना
2. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर डाॅक्टर, दवा व एंबुलेस:*  प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्रों की स्थिति ठीक किया जाना चाहिए और वहां बड़ी संख्या में बच्चे के डाॅक्टर बहाल किए जाने चाहिए. दवा व एंबुलेस का भी प्रबंध होना चाहिए.

कफील खान ने  ने आगे कहा कि अब तक 800 इस बीमारी से ग्रसित हो चुके है और 250 से ज़्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है. मृत्यु की दर 25 प्रतिशत है.

हम यह भी माँग करते हैं जिन माँ-बाप के बच्चें इस बीमारी से समय से पहले मृत्यु हो गयी उनको 10 लाख Rs का मुआवजा तथा परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दे .

सरकार इस पर सार्वजनिक माफ़ी माँगे की अपने कर्तव्य का दवित्या पूरा करने में असफल रही है और भविष्य में ऐसी घटना की पुनर्वित्रि ना हो उसके लिए प्रयास करे

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