इंजीनियरिंग छोड़कर बना किसान, करता है 300 से ज्यादा देसी सब्जियों की खेती

 
इंजीनियरिंग छोड़कर बना किसान, करता है 300 से ज्यादा देसी सब्जियों की खेती
नई दिल्ली। तमिलनाडु के डिंडिगुल जिले के कुटियागौंडनपुडुर गांव में अधियागई परमेश्वरन का 6 एकड़ का खेत है। यह जगह यहां के ओडनचत्रम क्षेत्र में आती है, जहां खेत की सिंचाई के लिए पानी की बहुत कमी है, लेकिन एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग छोड़कर खेती को चुनने वाले 29 साल के परमेश्वरन को इस बात का पूरा भरोसा था कि वो खेती में कुछ अच्छा करेंगे।

उनका ये भरोसा पूरा भी हुआ क्योंकि वह यहां ऐसी फसल उगा रहे हैं जो इस क्षेत्र की देसी किस्में हैं और यहां सूखे की स्थिति में भी आसानी से उग सकती हैं।

परमेश्वरन का जन्म एक किसान परिवार में हुआ और बचपन से ही उन्होंने अपने परिवार को सूखे से जूझते हुए देखा। हालांकि, उनके माता-पिता ने उनकी पढ़ाई में कोई कमी नहीं रखी और उन्हें इंजीनियरिंग करवाई, लेकिन परमेश्वरन को अपनी मिट्टी से प्यार था और वो वैसा ही बना रहा।

बेटर इंडिया से बात करते हुए परमेश्वरन कहते हैं कि जींस, वातावरण और मेरे पैशन की वजह से मैंने इंजीनियरिंग के चौथे साल में पढ़ाई छोड़ दी और एक फुल टाइम ऑर्गेनिक फार्मर बन गया।

2014 में परमेश्वरन ने 6 एकड़ जमीन पर जैविक खेती करना शुरू किया। वह कृषि वैज्ञानिक, एनवॉरमेंटल एक्टिविस्ट और जैविक किसान जी नम्मालवर से बहुत प्रेरित थे। उन्होंने खेती शुरू करने से पहले करूर के वनगम में एक वर्कशॉप भी अटैंड की। वहां एक्सपर्ट्स से उन्होंने कई चीजें सीखें। इत्तेफाक से यह वह वक्त तक जब बीटी बैंगन खबरों में चर्चा का विषय था।

इसके बाद उन्होंने देसी बीजों को इकट्ठा करने का सफर शुरू किया। इसके लिए वे तमिलनाडु के कई गांवों में गए। किसानों और खेती के एक्सपर्ट्स से मिले और अपने साथ ढेर सारी जानकारी वापस लेकर आए। रसायन मुक्त फसल उगाने के साथ ही परमेश्वरन ने आधियागई (तमिल में इसका मतलब पहली बहार होता है) नाम से एक बीजों का बैंक बनाया, जिसमें 300 से ज्यादा देसी फलों और सब्जियों की प्रजातियों के बीज हैं। 

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