ट्रांसजेंडर महिला से रेप के मामले में HC ने सुरक्षित रखा निर्णय

 
ट्रांसजेंडर महिला से रेप के मामले में HC ने सुरक्षित रखा निर्णय
नैनीताल। लिंग परिवर्तन कर पुरुष से महिला बनी महिला की प्राथमिकी पर दुष्कर्म की धारा की बजाय अप्राकृतिक यौन शोषण की धारा में मुकदमा दर्ज करने के मामले में हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।

ट्रांसजेंडर महिला ने अपने मंगेतर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पूर्व में कोर्ट ने पुलिस से कहा भी था कि वह महिला को महिला क्यों नहीं मान रही है।

कोटद्वार के इस मामले में मंगलवार को न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी की एकलपीठ में गृह सचिव ने शपथपत्र भी दाखिल किया। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार शपथपत्र में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के नालसा बनाम भारत सरकार (15 अप्रैल, 2014) के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ट्रांसजेंडर को अपनी पहचान का जेंडर स्वयं चुनने का अधिकार है तथा इसमें राज्य सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। 

इस मामले में कोटद्वार की एक महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस महिला का कहना था कि वह पहले पुरुष थी और उसका परिचय मुंबई के एक पांच सितारा होटल में नौकरी के दौरान कोटद्वार निवासी परीक्षित अरविंद जोशी से हुआ था।

दोनों के बीच प्रेम हुआ और इस दौरान वह लिंग परिवर्तन कर महिला बन गई। याची के मुताबिक जोशी ने शादी के बहाने उसे कोटद्वार बुलाया और उसके साथ रेप किया। इसकी प्राथमिकी याची ने कोटद्वार थाने में आईपीसी की धारा 376 में दर्ज कराई लेकिन कोटद्वार पुलिस ने 376 का मुकदमा दर्ज न करके धारा 377 या अप्राकृतिक यौन शोषण के तहत मुकदमा दर्ज किया।

याची ने सुप्रीम कोर्ट के नालसा बनाम भारत सरकार के मामले में हुए फैसले का हवाला दिया और कहा कि इस फैसले में कोर्ट ट्रांसजेंडर को अधिकार दिया है कि वह अपना जेंडर चुनने के लिए स्वतंत्र है।  लेकिन विवेचक और सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विपरीत व्याख्या की और कहा कि याची जन्म से पुरुष है तो इन्हें पुरुष ही माना जाएगा।

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