भारत का लोकतंत्र ब्रिटेन का गिफ्ट नहीं अवाम की ताकत है: प्रणब मुखर्जी

 
भारत का लोकतंत्र ब्रिटेन का गिफ्ट नहीं अवाम की ताकत है: प्रणब मुखर्जी
राकेश पाण्डेय
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि भारत का लोकतंत्र न तो ब्रिटेन की गिफ्ट है और न ही एक्सीडेंटल है, यह हिंदुस्तान की आवाम की ताकत है। यह बात मुखर्जी ने राजस्थान विधानसभा में आयोजित राष्ट्रमंडल संसदीय संघ राजस्थान चैप्टर की ओर से आयोजित उद्घाटन समारोह के दौरान कही।

मुखर्जी ने कहा कि भारत की संसदीय यात्रा तीन चरणों से गुजरी है। 1952 से 57 तक का शुरुआती फेज रहा है। इस चरण में भारत संवैधानिक और भौगोलिक रूप से मजबूत हुआ। 1967 से 1989 के बीच लोकतंत्र ने कई रूप देखे हैं। गठबंधन की सरकार भी बनी है। 2014 के बाद से फिर से मतदाताओं का रुझान नेशनल पार्टियों की ओर बढ़ा और फिर दो बार पूर्ण बहुमत की सरकार आई है।

मुखर्जी ने कहा कि 17 लोकसभा चुनाव हो चुके हैं लेकिन अभी तक किसी दल को 50 फीसदी मत नहीं मिले। उन्होंने कहा कि देश के लोकतंत्र में कई बदलाव आए, यही इस लोकतंत्र की खूबी है। पड़ोसी मुल्क हमारे साथ आजाद हुआ लेकिन राजनीतिक अस्थिरता हमेशा बनी रही। यहां विचारों का भेद है लेकिन देश का लोकतंत्र मजबूत है।

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