जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक की 'दो टूक'

 
जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक की 'दो टूक'
एसपी मित्तल 
12 अगस्त को केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के इंटरव्यू विभिन्न न्यूज चैनलों पर प्रसारित हो रहे हैं। अनुच्छेद 370 में बदलाव के बाद कश्मीर के ताजा हालातों पर मलिक ने दो टूक टिप्पणी की है। मलिक ने कहा कि जम्मू कश्मीर के सीएम रहे उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती जैसे नेता पांच अगस्त से ही जेलों में पड़े हैं, लेकिन इनके समर्थन में कहीं से भी विरोध की आवाज नहीं आ रही है।
इससे इन नेताओं को अपनी स्थिति का अंदाजा लगा लेना चाहिए। महबूबा पिछले कई दिनों से गैर जिम्मेदाराना बयान दे रही थीं, अब ऐसे बयानों की भी पोल खुल गई है। चूंकि महबूबा के पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद मेरे मित्र रहे इसलिए मैं महबूबा को अपनी बेटी की तरह मानता हंू, लेकिन महबूबा लगातार नासमझी के बयान देती रही। हालांकि मैंने सार्वजनिक बयानों में महबूबा को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं मानी। महबूबा को अपने कस्बे में मात्र दो प्रतिशत वोट मिले।
इसी प्रकार फारुख अब्दुल्ला जैसे नेता दस प्रतिशत वोटों पर सांसद बने हैं। यही वजह है कि बदली हुई परिस्थितियों में ऐसे नेताओं का कोई वजूद नजर नहीं आ रही है। अब जब 370 में बदलाव हो गया है, तो कश्मीर में विदेशी निवेश भी होगा। युवाओं को रोजगार मिलेगा। अगले दो माह में सरकारी नौकरियों को पिटारा खुल जाएगा। आप देखना दो माह में जम्मू कश्मीर में कितना परिवर्तन होता है। आज जम्मू कश्मीर के अधिकांश लोग सरकार के फैसले से खुश हैं। 370 की वजह से अब तक कश्मीरी जिन सुविधाओं से वंचित थे, वे सब सुविधाएं मिलने लगेगी। पिछले छह माह में राज्यपाल शासन के दौरान विकास के जो कार्य हुए उन्हीं को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के सामने रखा। मेरे लिए यह सबसे बड़ी उपलब्धि है कि मेरे द्वारा करवाए गए कार्यों को प्रधानमंत्री ने गिनाया है।  एक समय था, जब राजभवन को ड्रिंक के लिए माना जाता था, लेकिन मुझे तो पीने पिलाने का शोक नहीं है। मैंने राजभवन के द्वार आम जनता के लिए खोल दिए हैं। कश्मीर के लोग कभी भी राज भवन आ जा सकते है। मुझे जिस किसी माध्यम से समस्या मिली मैंने तत्काल समाधान करने का प्रयास किया।
शाह को डराने की कोशिश
राज्यपाल मलिक ने कहा कि अनुच्छेद 370 में बदलाव से पहले कई लोगों ने केन्द्रीय गृहमंत्री अमितशाह को डराने की कोशिश की। ऐसे लोगों का कहना रहा कि जहां कश्मीर में आतंकी हमला करेंगे, वहीं विदेशों में भी विवाद खड़ा हो सकता है। लेकिन इसे अमित शाह की दिलेरी ही कहा जाएगा कि डरावनी बातों को पीछे ढकेलते हुए 370 में बदलाव करवा ही दिया।

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