मानसी ने हादसे में खोया एक पैर, लेकिन नहीं मानी किस्मत से हार

 
मानसी ने हादसे में खोया एक पैर, लेकिन नहीं मानी किस्मत से हार
मुंबई। फेसबुक पेज Humans of Bombay ने एक शानदार कहानी शेयर की है। ये कहानी बैडमिंटन प्लेयर मानसी जोशी की है। जिन्होंने एक हादसे में एक पैर गंवा दिया, लेकिन हार नहीं मानी।

मानसी कहती हैं " उस वक्त मैं अपने टू-व्हीलर से अपने ऑफिस जा रही थी, जब एक ट्रक ने मुझे टक्कर मारी और मेरे पाँव को बुरी तरह कुचल दिया। इसमें ड्राईवर की गलती नहीं थी - वहां एक पिलर था जिस से वह आगे देख नहीं पाया। वहां मौजूद लोगो ने मुझे फ़ौरन अस्पताल पहुँचाया जहाँ मेरा ऑपरेशन 5:30 बजे किया गया जबकि यह दुर्घटना लगभग 9:30 बजे हुई थी। डॉक्टर ने मेरे पाँव को बचाने की पूरी कोशिश की पर कुछ दिनों बाद ही उसमे इन्फेक्शन हो गया और उसे काटना पड़ा। जब डॉक्टर ने मुझे बताया तब मैंने उनसे कहा, " आपने इतनी देर लगायी ही क्यों। मुझे पहले से पता था की ये होना है।"

इस पूरी परीक्षा से निकलने में जिस चीज़ ने मेरी मदद की वह थी - स्वीकृति- कि यह मेरी नियती है, और अब यह मुझे चुनना है कि इस पर रोऊँ, या इसे एक चुनौती की तरह स्वीकार करके आगे बढूँ। मैंने दूसरा विकल्प चुना। जब लोग मुझे मिलने अस्पताल आते थे और मेरी हालत देखकर रोने लगते थे, तब मैं ही उन्हें कोई चुटकुला सुना कर हंसाया करती थी!
मानसी ने हादसे में खोया एक पैर, लेकिन नहीं मानी किस्मत से हार

फिर मैंने फिजियोथेरेपी ली, और एक बार फिर से चलना सीखा। मेरा सबसे बड़ा डर था कि मैं बैडमिंटन नहीं खेल पाऊँगी जो बचपन से मेरा शौक रहा है - पर पता नहीं कैसे मैं उस समय भी खेल पा रही थी, जब मुझे चलने में भी कठिनाई हो रही थी। मैंने कॉर्पोरेट बैडमिंटन टूर्नामेंट जीतना शुरू किया और अपने एक दोस्त की सलाह पर नेशनल लेवेल पर खेला। मैंने नेशनल स्तर पर कई पदक जीते और इस साल इंग्लैंड में हुए पैरा बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप मे रजत पदक जीता। मैं दिन में 5 घंटे की ट्रेनिंग लेती हूँ, अपने सॉफ्टवेयर इंजिनियर के जॉब में रहते हुए, स्कूबा डाइविंग में ट्रेनिंग लगभग पूरी कर चुकी हूँ और लगभग पूरा भारत घूम चुकी हूँ। जब लोग मुझसे पूछते हैं, " आप इतना कुछ कैसे कर लेती हैं?" मैं उनसे बस एक सवाल करती हूँ -----

"आपको किस बात ने रोका हुआ है?"

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