श्री हरि विठ्ठल के भक्तों के लिए जाने वाली ट्रेन को MP नवनीत ने दिखाई हरी झंडी!

 
श्री हरि विठ्ठल के भक्तों के लिए जाने वाली ट्रेन को MP नवनीत ने दिखाई हरी झंडी!
नई दिल्ली। अमरावती से सांसद नवनीत रवि राणा ने श्री हरि विठ्ठल के भक्तों के लिए जाने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। रेलवे ने ने श्री हरि विठ्ठल के भक्तों के लिए ट्रेन में 4 अतिरिक्त कोच जोड़े है। यह यात्रा अमरावती में बारिश करवाने के लिए की जा रही है। इस यात्रा को हरी झंडी दिखाने के लिए नवनीत और उनके पति रवि राणा दोनों पहुंचे। स्टेशन पर दोनों का स्वागत किया गया।

बता दें कि नवनीत पहली बार सांसद बनी हैं। नवनीत का जन्‍म 3 जनवरी 1986 को हुआ था। 12वीं पास होने के बाद नवनीत ने पढाई छोड एक मॉडल के रूप में काम करना शुरू कर दिया। इस दौरान उन्‍होंने 6 म्‍यूजिक एलबम में काम किया। नवनीत की शादी महाराष्‍ट्र के विधायक रवि राणा से 2 फरवरी 2011 को अमरावती में हुई थी। राजनीति में आने से पूर्व एक मॉडल थीं और वे पंजाबी फिल्मों में काम करना चाहती थीं लेकिन किस्मत उन्हें राजनीति में ले आईं।

नवनीत कोर ने कई तेलगू फिल्मों में भी कार्य किया है और इन्होंने महाराष्ट्र के विधायक रवि राणा के साथ शादी की और इसके बाद फिल्मों से दूरियां बना ली थी इसके पश्चात नवनीत कोर राजनीति में आईं और अपनी खूबसूरती के कारण खूब सुर्खियां बटोरी हैं।

नवनीत अपनी हेल्थ को लेकर बहुत सहज रहती हैं और हर दिन नियमित रूप से योगा करती हैं आपको बता दें कि नवनीत कोर बाबा रामदेव की काफी बड़ी फैन हैं और उनसे कई बार मिल भी चुकी हैं। नवनीत कोर ने बाबा रामदेव के अधिकतर कैंपों में अपनी उपस्थिति दर्ज की है।

बाबा रामदेव के योगा कैंप के दौरान उनकी मुलाकात मुंबई में एक नेता रवि राणा से हुई और बाद में दोनों ने शादी करके बाबा रामदेव का आशिर्वाद भी लिया था। नवनीत को पहली बार इस योगा कैंप में रवि राणा ने देखा और देखते रह गए थे। उसके पश्चात जितने दिन मुंबई में इनका कैंप चला उतने दिन में ये दोनों अच्छे दोस्त बन गए और एक दूसरे के ख्यालात मिलते चले गए रवि राणा ने कैंप समाप्त होने के दो दिन पहले इन्हें प्रपोज किया और फिर नवनीत ने भी अपनी सहमति जताई और दोनों ने शादी कर ली। इसके बाद दोनों बाबा रामदेव के पास आशीर्वाद लेने चले गए और इनकी कहानी सुनकर बाबा रामदेव काफी खुश हुए थे।

देश को आजादी मिलने के बाद 1951 में हुए लोकसभा चुनाव में पहली बार चुनाव जीतकर कांग्रेस के उम्मीदवार पंजाबराव देशमुख संसद भवन पहुंचे थे। जिसके बाद से ही यह सीट कांग्रेस की गढ़ कही जाने लगी और इस सीट से 1984 तक कांग्रेस का ही उम्मीदवार चुनाव जीतकर संसद भवन पहुंचता रहा है। लेकिन यह सीट कांग्रेस के हाथ से 1989 से निकल गई। हालांकि पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल इस सीट से 1991 में चुनाव जीतने में कामयाब हुई। लेकिन 1996 से यह सीट कांग्रेस के पास फिर से वापस नहीं आई। जिसे बाद से लगातार शिवसेना इस सीट से जीत हासिल करती आ रही है।

From around the web