उद्योगों में अधिकाधिक कार्य बल को समायोजित करने समर्थ होना चाहिए: निर्मला

 
उद्योगों में अधिकाधिक कार्य बल को समायोजित करने समर्थ होना चाहिए: निर्मला
नई दिल्ली। केन्द्रीय वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने आगामी आम बजट 2019-20 के संबंध में आज विभिन्न हितधारकों के साथ बजट पूर्व विचार-विमर्श की शुरुआत की। उनकी दूसरी बैठक उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र के हितधारकों के साथ आयोजित हुई।
अपने उद्घाटन संबोधन में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि केन्द्र सरकार ने 2014 से ही उद्योग से संबंधित अनेक पहलों की शुरुआत की है जिससे समग्र व्यापार माहौल में महत्वपूर्ण सुधार आया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा नियमों को सरल और विवेकपूर्ण बनाने के बारे में ज्यादा जोर दिया गया है। शासन को अधिक प्रभावी और निपुण बनाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी की शुरुआत की गई है। इसके परिणामस्वरूप भारत 190 देशों में अपनी स्थिति सुधार कर 77वें पायदान पर आ गया है। भारत विश्व बैंक व्यापार रिपोर्ट 2019 के अनुसार 2018 की व्यापार रिपोर्ट में 23वें पायदान पर है। वित्त मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि भारत के कुल कार्य बल का 24 प्रतिशत हिस्सा औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत है इसलिए जनसांख्यिकीय लाभांश का पूरा लाभ उठाने के लिए उद्योग को अधिक से अधिक कार्य बल को समायोजित करने में समर्थ होना चाहिए।
वित्त मंत्री के साथ इस बैठक में केन्द्रीय वित्त और कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर, वित्त सचिव सुभाष सी गर्ग, व्यय सचिव गिरीश चन्द्र मुर्मू, राजस्व सचिव अजय नारायण पांडे, डीएफएस सचिव राजीव कुमार, डीआईपीएएम सचिव अतनू चक्रवर्ती, पर्यटन सचिव योगेन्द्र त्रिपाठी, सूचना और प्रसारण मंत्रालय में सचिव अमित खरे, उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के सचिव रमेश अभिषेक, वाणिज्य विभाग में सचिव अनूप वधावन, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग में सचिव प्रमोद चन्द्र मोदी, सीबीडीटी के अध्यक्ष पी के दास, सीबीआईसी के चेयरमैन डॉ. के वी सुब्रमनियन तथा सीईए और वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
भारतीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने दृष्टिकोण से उद्योग सेवा और व्यापार क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने औद्योगिक क्षेत्र, भूमि सुधार, विशेष आर्थिक क्षेत्र, औद्योगिक नीति, अनुसंधान और विकास में निवेश, कर शासन के सरलीकरण, पर्यटन क्षेत्र की संभवानाओं को बढ़ाने, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई), वस्तु और सेवा कर (जीएसटी), पूंजी लाभ कर, कॉरपोरेट कर एमएसएमई क्षेत्र, ई कॉमर्स, कौशल विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र, स्टार्टअप्स, मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र तथा खाद्य विनिर्माण उद्योग के बारे अनेक सुझाव प्रस्तुत किए।  

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