वर्ष 2032 तक 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की जरुरत: सीतारमण

 
वर्ष 2032 तक 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की जरुरत: सीतारमण
केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमन ने आज संसद में आर्थिक समीक्षा 2018-19 की आर्थिक समीक्षा पेश की। देश के उद्योग और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों के विश्लेषण में समीक्षा में कहा गया है कि भारत को एक मजबूत और लचीले बुनियादी ढांचे के साथ औद्योगिक व्यवस्था की आवश्यकता है, जिसमें लचीलापन हो। वर्ष 2018-19 के दौरान औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के संदर्भ में औद्योगिक विकास की दर वर्ष 2017-18 की 4.4 प्रतिशत की तुलना में 3.6 प्रतिशत रही। वर्ष 2018-19 के दौरान यह गिरावट मुख्य तौर पर मध्यम एवं लघु उद्योगों को धीमे क्रेडिट प्रवाह आदि की वजह से तीसरी और चौथी तिमाही में धीमी विनिर्माण गतिविधियों के कारा रही। इस बीच, आठ प्रमुख बुनियादी ढांचा सहायक उद्योगों ने वर्ष 2018-19 के दौरान 4.3 प्रतिशत की समग्र वृद्धि दर हासिल की, जो वर्ष 2017-18 में प्राप्त वृद्धि दर के बराबर है।
समीक्षा में कहा गया है कि सरकार ने विनिर्माण वृद्धि को तेज गति देने के लिए प्रमुख क्षेत्रों जैसे स्टार्ट-अप इंडिया, ईज ऑफ डुइंग बिजनेस, मेक इन इंडिया, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति सुधार आदि में अनेक उपायों की शुरूआत हुई है। वर्ल्ड बैंक ईज ऑफ डुइंग बिजनेस रिपोर्ट 2018 में 190 देशों की रैंकिंग में भारत ने 77वां स्थान हासिल किया है। सरकार एक उदार एफडीआई नीति के जरिए निवेश को बढ़ावा देने में अग्र-सक्रिय भूमिका निभा रही है। वर्ष 2018-19 के दौरान एफडीआई इच्टिी में कुल अंतर्वाह 44.36 अरब डॉलर था, जबकि 2017-18 के दौरान यह 44.85 अरब अमरीकी डॉलर था। सौभाग्य, पीएमएवाई आदि जैसे क्षेत्र विशेष प्रमुख कार्यक्रमों के लागू होने से सतत और लचीले बुनियादी ढांचे को पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है। वर्ष 2018-19 में सड़कों का निर्माण प्रति दिन 30 किलोमीटर की दर से बढ़ा, जबकि 2014-15 में यह 12 किलोमीटर प्रति दिन था। रेल भाड़ा और यात्रियों की आवाजाही 2017-18 के 0.64 प्रतिशत की तुलना में 2018-19 में 5.33 प्रतिशत बढ़ गया। भारत में 2018-19 में कुल टेलीफोन कनेक्शन 118.34 करोड़ तक पहुंच गए। बिजली की स्थापित क्षमता 2018 में 3,44,002 मेगावाट से बढ़कर 2019 में 3,56,100 मेगावाट हो गई।
समीक्षा में कहा गया है कि वर्ष 2018-19 के दौरान औद्योगिक क्षेत्र के कार्य निष्पादन में वर्ष 2017-18 की तुलना में सुधार हुआ है। वास्तविक सकल मूल्यवर्धित (जीवीए) औद्योगिक विकास की दर वर्ष 2017-18 में 5.9 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2018-19 के दौरान बढ़कर 6.9 प्रतिशत हो गई। आईआईपी के अनुसार औद्योगिक विकास दर 2017-18 में 4.4 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2018-19 में 3.6 प्रतिशत थी। वर्ष 2018-19 के दौरान खनन, विनिर्माण और बिजली क्षेत्र में क्रमश: 2.9 प्रतिशत, 3.6 प्रतिशत और 5.2 प्रतिशत की सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई।
केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों ने भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्य कर रहे केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के 257 उद्यमों में से 174 उद्यम लाभ की स्थिति में थे और दो लाभ नहीं और हानि नहीं की स्थिति में थे। समीक्षा में कहा गया है कि सीपीएसई के प्रदर्शन में सुधार की काफी गुंजाइश है।
समीक्षा में आगे कहा गया है कि उद्योग में सकल पूंजी निर्माण की वृद्धि दर 2016-17 में (-) 0.7 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2017-18 में 7.6 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई, जो उद्योग में निवेश की बढ़ोतरी को दर्शाता है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार औद्योगिक क्षेत्र में सकल बैंक क्रेडिट प्रवाह में मार्च 2018 में 0.7 प्रतिशत हुई वृद्धि की तुलना में मार्च 2019 में 6.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सरकार ने 2014 से उद्योगों के सुधार संबंधी अनेक कदम उठाए हैं, जिनसे समग्र कारोबारी माहौल में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। उद्यमी युवाओं के बीच नवाचार और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त, 2015 को स्टार्ट-अप इंडिया स्टैंड-अप इंडिया पहल की घोषणा की थी। 1 मार्च 2019 को 16,578 नये स्टार्ट-अप को 499 जिलों में मान्यता दी गई। विनियमों को आसान बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। जैसे स्टार्ट-अप द्वारा एकत्र किए गए निवेश पर आयकर से छूट आदि।
सरकार द्वारा विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की एक उदार नीति के माध्यम से निवेश को प्रोत्साहित करने की एक पूर्व सक्रिय पहल की जा रही है। बुनियादी ढांचे में निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, राष्ट्रीय निवेश और बुनियादी ढांचा कोष का करीब 400 अरब रुपये की पूंजी के साथ गठन किया गया, ताकि व्यावसायिक दृष्टि से संभव परियोजनाओं को निवेश के अवसर प्रदान किए जा सकें। 
भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र ने इस क्षेत्र के तेजी से विकास के लिए और व्यापार में आसानी को बढ़ावा देने के लिए अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जिनमें ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से 59 मिनट के भीतर एक करोड़ रुपये तक के ऋणों के लिए सैद्धांतिक अनुमोदन प्रदान करना शामिल था। सभी जीएसटी पंजीकृत एमएसएमई के लिए एक करोड़ रुपये तक के वृद्धिशील क्रेडिट के संबंध में 2 प्रतिशत की ब्याज सहायता भी प्रदान की जा रही है और यह योजना 975 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ दो वित्तीय वर्षों 2018-19 और 2019-20 की अवधि के लिए प्रचालन में रहेगी। सरकार ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गांरटी न्यास निधि, प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए क्रेडिट समर्थित पूंजी सब्सिडी योजना, पारम्पारिक उद्योगों के उत्थान के लिए निधि योजना तथा नये उद्यमों की स्थापना एवं मौजूदा उद्यमों के विकास के लिए सूक्ष्म और लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम जैसी कई योजनाएं।कार्यक्रम चलाए हैं।
समीक्षा में कहा गया है कि देश में राजमार्गों का निर्माण की गति में तेजी आई है। वर्ष 2014-15 में प्रति दिन 12 किलोमीटर सड़क का निर्माण होता था, वहीं वर्ष 2018-19 में प्रति दिन 30 किलोमीटर की दर से सड़कों का निर्माण हुआ। इसे प्रक्रिया को सरल बनाने, अंतर-मंत्रालयी समन्वय के लिए तंत्र को ठीक करने, सुस्त पड़ी हुई परियोजनाओं को पटरी पर लाने के लिए व्यापक कदम उठाने, निजी और सार्वजनिक दोनों प्रकार की निधियों का लाभ उठाने के लिए उन्नत परियोजनाओं का वित्त पोषण आदि किया जा सका। इस क्षेत्र में वर्ष 2014-15 में कुल निवेश 51,914 करोड़ रुपये था, वहीं वर्ष 2018-19 में यह निवेश बढ़कर 1,58,839 करोड़ रुपये हो गया।
वर्ष 2014-15 से 2018-19 की अवधि के दौरान सड़क क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियों में दिल्ली के आस-पास ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे, कश्मीर में चेनानी-नशरी सुरंग, असम में ब्रहमपुत्र नदी पर धौला-सदिया पुल का निर्माण शामिल था।
समीक्षा में कहा गया है कि यात्रियों और सामरन के लिए भारत के अनुसूचित घरेलू हवाई परिवहन में वर्ष 2018-19 के दौरान में क्रमश: 14 प्रतिशत और 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2018-19 के दौरान कुल घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों की संख्या 204 मिलियन दर्ज की गई थी। हवाई विमान यात्रियों की बढ़ती हुई मांग को पूरा करने और दूर-दराज के क्षेत्रों में हवाई संपर्क की व्यवस्था करने के लिए नये ग्रीन फील्ड हवाई अड्डों को तेजी से विकसित किया जा रहा है। वर्ष 2018-19 के अंतिम चरण में कुल 107 हवाई अड्डों पर निर्धारित एयर लाइन संचालन की व्यवस्था की गई।
उड़ान (उड़े देश का हर नागरिक) योजना के अंतर्गत क्षेत्रीय संपर्क के लिए बोली लगाए जाने के तीन चरणों में कुल 719 रूट आवंटित किए गए हैं, जिनमें से 182 रूट चालू स्थिति में हैं। इस येाजना में 23 ऐसे हवाई अड्डों को संपर्क प्रदान किया गया है, जो कार्य नहीं कर रहे थे, जबकि वर्ष 2026-27 तक 100 हवाई अड्डों को चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2018-19 में घरेलू विमान कार्गो 12.1 प्रतिशत बढ़ गया और भारत में 3.6 एमएमटी एयर कार्गो का निपटान किया गया। प्रथम राष्ट्रीय एयर कार्गो पोलिसी की रूपरेखा जनवरी 2019 में जारी की गई। इसका उद्देश्य वर्ष 2026-27 तक 10 मिलियन टन भार वहन के लक्ष्य पर पहुंचना है। उच्च हवाई अड्डा टैरिफ, रॉयल्टी, कुशल मानव शक्ति की कमी, रख-रखाव, मरम्मत और ओवर हॉल सुविधाओं के साथ-साथ विमान कल लीज अवधि की समाप्ति पर कई प्रकार की जांच के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता के कारण घरेलू एयरलाइनों के बीच तीखी प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिला है।

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