नामुमकिन कुछ भी नहीं, बर्तन मांजने वाली महिलाओं ने शुुरू किया बिज़नेस, टर्नओवर हुआ 1 करोड़

 
नामुमकिन कुछ भी नहीं, बर्तन मांजने वाली महिलाओं ने शुुरू किया बिज़नेस, टर्नओवर हुआ 1 करोड़छत्तीसगढ़ के दुर्ग में बैगापारा के राउत-ठेठवार समाज की महिलाएं अब 28 यादव व अन्य समाज की महिलाओं ने 11 हजार जुटाए। एक महिला समूह बनाकर दुग्ध उत्पादन शुरू किया। महिलाओं ने 25 बकरियां पाली। उनका दूध बेचना शुरू किया। पांच साल 88 महिलाएं जुड़ चुकी हैं। 10 रुपए में कोई भी महिला सदस्य बन सकती हैं।

दुग्ध उत्पादन के साथ इस संस्था ने अब देशी घी का भी प्रोडक्शन शुरू कर दिया है। रविवार को इसकी शुरुआत की गई। शहर विधायक अरुण वोरा, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष प्रीतपाल बेलचंदन, समाज के प्रदेशाध्यक्ष मेघनाथ यादव, गहिरा गुरु राजेश यादव आदि इसमें में शामिल हुए।

इस महिला समूह को सहकारिता से भी मदद मिली। सहकारी बैंक की मदद से उन्हें करीब 1 लाख रुपए का लोन मिला। सभी 88 महिलाएं महीने में करीब साढ़े 9 हजार रुपए की आय अर्जित कर रही हैं। अध्यक्ष करुणा यादव 12 वीं पास हैं। महिलाओं को जोड़ने व रोजगार के जज्बे ने मुकाम पर पहुंचाया।

लगातार दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे इस महिला समूह ने पशुधन को बढ़ाने के लिए करीब 1.64 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसमें पशुधन बढ़ाने के साथ मट्‌ठा, दही का प्रोडक्शन शुरू करने की प्लानिंग है। वर्तमान में देशी घी तैयार करने की शुरुआत समूह ने कर दी है।

बहुत मुश्किल से हम महिलाएं इस स्थान तक पहुंच पाई हैं। कभी हमारे बीच की कुछ महिलाएं बर्तन मांजने, कपड़े धोने का काम कर रोजगार तलाशती थीं। हमने उन्हें जोड़ा एक ग्रुप बनाया और काम शुरू किया। पहले बकरियां ली, उसका दूध महंगा बिकता है। उससे हमें अच्छी आय हुई, इसके बाद गाय व भैंस का पालन शुरू कर हमने दूध बेचना शुरू किया। आज हम खुद दूध बेचने नहीं जातीं, कमीशन पर लोगों को लगा रखा है। इससे आगे बढ़ते हुए हमने देशी घी तैयार करना शुरू कर दिया है।

- करुण यादव, अध्यक्ष गोपिका दुग्ध उत्पादन समिति बैगापारा 

From around the web