राहुल निष्क्रिय, लेकिन सोनिया और प्रियंका गांधी कांग्रेस में जान फूंकने में लगी

 
राहुल निष्क्रिय, लेकिन सोनिया और प्रियंका गांधी कांग्रेस में जान फूंकने में लगी
एसपी मित्तल 
3 जुलाई को भी दिल्ली में कांगे्रस के दिग्गज नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में राहुल गांधी के बगैर कांग्रेस को चलाने पर विचार हुआ। लेकिन कोई सहमति नहीं बन रही है। लोकसभा चुनाव में हार की जिममेदारी लेते हुए राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है और लाख मनुहार के बाद भी इस्तीफा वापस नहीं ले रहे हैं। कोई सवा महीने से कांग्रेस बगैर अध्यक्ष के ही चल रही है। राहुल गांधी भले ही निष्क्रिय हो, लेकिन माताजी श्रीमती सोनिया गांधी और बहन श्रीमती प्रियंका वाड्रा संगठन में जान फूंकने में लगी हुई हैं। दोनों ही महिला नेत्री कार्यकर्ताओं को भरोसा दिला रही हैं कि मुसीबत के इस दौर में वे संगठन के साथ खड़ी हैं।

2 जुलाई को श्रीमती सोनिया गांधी ने रायबरेली की सांसद की हैसियत से लोकसभा में शून्यकाल में सवाल उठाया। रायबरेली में बनने वाली कोच फैक्ट्री और रेलवे में निजीकरण के मुद्दे पर सोनिया ने केन्द्र पर जमकर हमला बोला, वहीं यूपी की कानून व्यवस्था को लेकर प्रियंका गांधी ट्वीटर पर योगी सरकार की आलोचना की। प्रियंका ने ट्वीट पर यूपी की भाजपा सरकार को सफाई भी देनी पड़ी है। प्रियंका गांधी यूपी के दौरे भी कर रही हैं। कांग्रेस की राजनीति में राहुल गांधी की क्या भूमिका होगी, यह अभी किसी को भी पता नहीं है, लेकिन सोनिया गांधी और प्रियंका ने अपना इरादा व्यक्त कर दिया है।

सोनिया और प्रियंका को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने पर राहुल गांधी ने वीटो लगा रखा है, इसलिए कोई भी नेता इन दोनों के नाम का प्रस्ताव नहीं कर रहे हैं। गांधी परिवार के बगैर कांग्रेस की स्थिति वैसी ही जैसा बिना पानी के मछली। कांग्रेस के नेता भी जानते हैं कि गांधी परिवार के बगैर कांग्रेस चल नहीं पाएगी, इसलिए राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और एमपी के सीएम कमलनाथ अपने अपने प्रदेशों से लोगों को भेज कर दिल्ली में राहुल गांधी के आवास पर धरना दिलवा रहे हैं, लेकिन ऐसे नेता पचास वर्ष की उम्र वाले राहुल गांधी को अभी भी बच्चा समझ रहे हैं। गहलोत और कमलनाथ जैसे नेताओं को लगता है कि जिस प्रकार छोटा बच्चा छोटी-छोटी बात पर रूठ जाता है, लेकिन जब बच्चे को परिवार के सभी सदस्य मिलकर मनाते हैं तो बच्चा फिर से खेलने कूदने लग जाता है। लेकिन इस बार राहुल ने भी ठान ली है कि वे किसी भी स्थिति में राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद दोबारा से नहीं संभालेंगे, भले ही कितना भी नुकसान हो जाए। राहुल गांधी को जब कांग्रेस की सरकारों के गिरने की भी चिंता नहीं है। यह बात अलग है कि राहुल का वीटो हटा कर सोनिया या प्रियंका राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाएं।
चुनाव जल्द हो-राहुल गांधी:
3 जुलाई को संसद भवन परिसर में मीडिया कर्मियों से संवाद करते हुए राहुल गांधी ने स्पष्ट कहा कि अब वे कांग्रेस के अध्यक्ष नहीं है। सीडब्ल्यूसी को जल्द से जल्द नए अध्यक्ष का चयन करना चाहिए। नए अध्यक्ष के नाम का फाइनल होना मेरी जानकारी में नहीं है। मैं इस्तीफे के अपने फैसले पर कायम हूं।

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