साध्वी प्रज्ञा का दर्द बेकसूर मुसलमानों जैसा है: मौलाना आमिर रशादी

 
साध्वी प्रज्ञा का दर्द बेकसूर मुसलमानों जैसा है: मौलाना आमिर रशादी
नई दिल्ली। राष्ट्रीय ओलमा काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी ने मालेगांव बम कांड की आरोपी साध्वी प्रज्ञा से सहमति जताते हुए कहा है कि देश में भगवा या इस्लामी नहीं बल्कि ‘सरकारी आतंकवाद’ फैला है। रशादी ने कहा कि मैं आतंकवाद के आरोप में बेकुसूर मुसलमानों को फंसाये जाने के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा हूं। अपनी जो व्यथा साध्वी प्रज्ञा बता रही हैं, वही उन बेकुसूर मुस्लिम युवकों की भी है जिन्हें दहशतगर्दी के आरोप में जेल में डाला गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमानों को आतंकवाद के आरोप में फंसाने के पीछे का मकसद मुस्लिमों को राजनीतिक रूप से ‘अछूत’ बनाने का है। रशादी ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा का कहना है कि सरकारी एजेंसियों ने उनको बेवजह फंसाया और धर्म को आतंकवाद से जोड़ा जाना देशद्रोह है। साध्वी जी भी हमारी ही बात कह रही हैं।

साध्वी की बात से साबित होता है कि कांग्रेस सरकार की एजेंसियों ने सरकार की शह पर उनको फंसाया। आज वे ही एजेंसियां उन्हें क्लीनचिट दे रही हैं। जब उस वक्त की एजेंसियों ने साध्वी जी को फंसाया तो इसका मतलब यह है कि उन्हीं एजेंसियों ने ही मालेगांव कांड किया। ज़ी न्यूज़ पर छपी खबर के अनुसार, उन्होंने कहा ‘ठीक यही बात बेकुसूर मुस्लिम युवकों को फंसाने के लिये की जाती है। सचाई यह है कि हिन्दुस्तान में ना तो भगवा आतंकवाद है और ना ही इस्लामी आतंकवाद।

यहां पर सरकारी आतंकवाद है। रशादी ने कहा कि बेकुसूर मुसलमानों को आतंकवाद के आरोपों में फंसाने के मामले में भाजपा और कांग्रेस एक ही नीति बनाकर उनको देशद्रोही साबित करने की होड़ में लगी हुई है।

इसके पीछे सीधा मकसद यह है कि हिन्दुस्तान में मुसलमानों को राजनीतिक रूप से अछूत बनाया जाए और उनका कोई नेतृत्व ना तैयार हो, और अगर तैयार भी हो तो उसके बारे में कहा जाए कि इन आतंकवादियों को वोट मत देना, वरना ये हुकूमत में आ जाएंगे।

From around the web