क्या अशोक गहलोत और सचिन पायलट से आगे निकलना चाहते हैं शांति धारीवाल?

 
क्या अशोक गहलोत और सचिन पायलट से आगे निकलना चाहते हैं शांति धारीवाल?
एसपी मित्तल 
राजस्थान की कांग्रेस सरकार के संसदीय कार्य और नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल लगातार सुर्खियों में हैं। 23 जुलाई को गौमाता पर विवादित बयान और 24 जुलाई को विधानसभा में हंगामा करवा दिया। 25 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने साफ कहा कि देश के सर्वोच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए गलत बयानी नहीं होनी चाहिए।

जोशी ने यह भी कहा कि  वे प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया के साथ 24 जुलाई की सदन की कार्यवाही की समीक्षा करेंगे और यदि कोई तथ्य गलत पाया गया तो उसे डिलिट कर दिया जाएगा। अध्यक्ष के कथन के बाद विधानसभा में प्रश्नकाल शांतिपूर्ण तरीके से चला। 24 जुलाई की शाम को विधानसभा में तब हंगामा हो गया था। जब शांति धारीवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को वाल्मीकि समाज का विरोधी बताया।

धारीवाल ने कहा कि मोदी जब 2007 में गुजरात के सीएम थे, तब उनके भाषणों को लेकर कर्मयोगी  नामक एक पुस्तक प्रकाशित हुई थी, इस पुस्तक में मोदी ने वाल्मीकि समुदाय के सदियों से चले आ रहे पेशे और दूसरों की गंदगी साफ करने को अध्यात्मिक अनुभव होने जैसा बताया था। पीएम मोदी के हवाले से ऐसी बाते कहने पर भाजपा के विधायकों में जोरदार हंगामा किया। यहां तक कि विधानसभा में धरना तक दिया गया। लेकिन शांति धारीवाल अपने बयान पर कायम रहे।
पुस्तक पर विवाद:
धारीवाल ने जिस पुस्तक के अंश पढ़ कर सुनाए उस पर शुरू से ही विवाद रहा है। मोदी जब 2007 में गुजरात के सीएम थे, तब वाल्मीकि समुदाय के उत्थान और विकास के लिए कर्मयोगी शिविर लगाए गए। इन शिविरों में मोदी ने भाषण भी दिए। इन्हीं भाषाणों के आधार पर कर्मयोगी नामक पुस्तक तैयार की गई। लेकिन यह पुस्तक आज तक भी प्रकाशित नहीं हुई है। इस पुस्तक से यह भी पता नहीं चलता कि जो बातें लिखी हैं उन पर मोदी ने सहमति जताई है। हालांकि दो वर्ष पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यही मुद्दा उठाया था, तभी भाजपा की ओर से खंडन किया गया। अब इसी विवादित पुस्तक का हवाला देकर धारीवाल राजस्थान विधानसभा में हंगामा करवा रहे हैं। यह तो अच्छा है कि अध्यक्ष के पद पर सीपी जोशी जैसे अनुभवी राजनेता बैठे हैं, जो मामले को संभाल रहे हैं।
आगे निकलना चाहते हैं धारीवाल:
राजनीतिक क्षेत्रों में चर्चा है कि शांति धारीवाल राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट से आगे निकलना चाहते हैं। यदि अशोक गहलोत कांगे्रस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं तो सीएम बनने का अवसर पायलट को ही मिलेगा, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला कर धारीवाल कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना चाहते हैं। यही वजह है कि वे लगातार विवादित बयान दे रहे हैं। देखना होगा कि धारीवाल की इन कार्यवाहियों को गहलोत और पायलट किस नजरिए से लेते हैं। वैसे धारीवाल के बयान से वाल्मीकि समाज पर कोई असर नहीं पड़ा है। देश का वाल्मीकि समाज जानता है कि स्वच्छता अभियान के अंतर्गत नरेन्द्र मोदी ने ही सफाई कर्मियों के पैर तक धोए थे।

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