तो क्या 3 हजार करोड़ रुपए के कारोबारी रिजु झुनझुनवाला लेंगे श्रमिक की मौत की जिम्मेदारी?

 
तो क्या 3 हजार करोड़ रुपए के कारोबारी रिजु झुनझुनवाला लेंगे श्रमिक की मौत की जिम्मेदारी? एसपी मित्तल 
आखिर 12 अप्रैल की रात को जयपुर के सरकारी एसएमएस अस्पताल में श्रमिक सत्यनारायण पाराशर की मौत हो ही गई। सत्यनारायण के सिर में 30 मार्च को तब चोट लगी थी, जब वह अजमेर के बिजयनगर स्थित राजस्थान स्पिनिंग एंड वीविंग मिल में कार्य कर रहा था। यह मिल लक्ष्मी निवास झुनझुनवाला समूह के द्वारा संचालित हैं। समूह का कोई तीन हजार करोड़ रुपए का कारोबार है और रिजु झुनझुनवाला समूह के एमडी हैं। अजमेर संसदीय क्षेत्र से रिजु ही कांग्रेस के उम्मीदवार हैं।
आरोप है कि इलाज में लापरवाही बरतने की वजह से श्रमिक की मौत हो गई। तीस मार्च को दुर्घटना के बाद श्रमिक को अजमेर के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया गया। चुनाव में कोई बवेला नहीं हो, इसलिए श्रमिक को जयपुर के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया। चूंकि सरकारी अस्पताल में सरकारी तौर तरीके से इलाज हुआ, इसलिए 12 अप्रैल को श्रमिक की मौत हो गई।
श्रमिक सत्यनारायण पाराशर का परिवार बेहद गरीब है। रिजु झुनझुनवाला भले ही चुनाव में पानी की तरह पैसा बहा रहे हों, लेकिन अपनी मिल में जख्मी हुए श्रमिक का बेहतर इलाज नहीं करवा पाए। चुनाव प्रचार के दौरान अजमेर संसदीय क्षेत्र के 19 लाख मतदाताओं की सेवा करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन मौत से संघर्ष कर रहे अपने ही श्रमिक की कुशलक्षेम पूछने के लिए अस्पताल तक नहीं गए। रिजु कह सकते हैं कि उनकी कपड़ा मिलों और पावर प्लांटों पर हजारों श्रमिक काम करते हैं। वे किस किस का ध्यान रखेंगे। सवाल उठता है तो फिर अजमेर के 19 लाख मतदाताओं की सेवा का वायदा क्यों कर रहे हैं?
जब अपनी मिल के जख्मी श्रमिक को मौत से संघर्ष करने के लिए छोड़ दिया जाता है तो फिर 19 लाख मतदाताओं की सेवा के वायदे पर प्रश्न चिह्न लगता है। यदि रिजु में थोड़ी सी भी मानवता होती तो वे अपने श्रमिक की कुशलक्षेम पूछने जरूर जाते। चूंकि रिजु तीन हजार करोड़ रुपए के कारोबारी हैं, इसलिए एक श्रमिक का जख्मी और फिर मौत होना उनके लिए कोई मायने नहीं रखता है। चूंकि रिजु बड़े कारोबारी है और वर्ष में 6 माह विदेश में रहते हैं, इसलिए श्रमिक की मौत के बाद अनेक पैरोकार भी आ गए।
अंतिम संस्कार को लेकर विवाद
यूं तो श्रमिक की मौत के बाद से ही अंतिम संस्कार की तैयारियां रिजु झुनझुनवाला के पैरोकारों ने कर दी थी, लेकिन मृतक के परिवार के सदस्य चाहते थे कि सभी वायदे लिखित में किए जाए ताकि बाद में कोई विवाद न हो, इसलिए कई घंटों तक श्रमिक का शव बिजयनगर में बाफना जैन तीर्थ स्थल के बाहर एम्बुलैंस में पड़ा रहा। इधर, पैरोकार मोल भाव करते रहे और उधर परिवार के सदस्य शव का इंतजार करते रहे। एक बार तो परिवार के सदस्यों ने ऐलान कर दिया कि शव को गुलाबपुरा स्थित मयूर सूटिंग मिल के सामने रखा जाएगा। इस घोषणा के बाद बड़ी संख्या में श्रमिक भी एकत्रित हो गई। हालांकि पैरोकारों का यह प्रयास रहा कि अंतिम संस्कार शांतिपूर्ण तरीके सो हो जाए। कहा जा रहा है कि रिजु झुनझुनवाला की सहमति के बाद परिवार को कुछ राशि नकद दी जाएगी। परिवार के एक सदस्य को उसी मिल में नौकरी। चूंकि तीन हजार करोड़ रुपए के कारोबारी के पैरोकार भी प्रभावशाली रहे, इसलिए विरोध की अग्नि भी थोड़ी ही देर में शांत हो गई। असल में बड़े कारोबारियों को सब पता है कि आग को काबू में कैसे किया जाता है, लेकिन यह सच है कि सत्यनारायण पाराशर की मौत रिजु झुनझुनवाला के स्वामित्त्व वाली बिजयनगर की मिल में ही हुई। 30 मार्च को मिल में दुर्घटना के बाद यदि समुचित इलाज हो जाता तो श्रमिक को बचाया जा सकता था। रिजु के स्वामित्व वाली मिल में सुरक्षा के कितने उपाए थे, इसकी जांच संभव नहीं है क्योंकि प्रदेश में रिजु की कांग्रेस पार्टी का ही राज है। मिल के अधिकारियों ने दुर्घटना की जो जांच रिपोर्ट बनाई है उसमें श्रमिक पाराशर को ही कसूरावार ठहराया है। वैसे भी मिल प्रबंधन का कहना है कि पाराशर ठेका श्रमिक है। यानि रिजु की कपड़ा मिलों में अधिकांश कार्य ठेके पर करवाया जाता है। मजे की बात यह है कि अजमेर में चुनाव प्रचार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट कह रहे है कि रिजु सांसद बनेंगे तो अजमेर का औद्योगिक विकास भी होगा। सवाल उठता है कि जब रिजु अपनी मिलों में ठेके पर श्रमिक रखते हैं तो फिर अजमेर के युवाओं को रोजगार कैसे मिलेगा? मृतक सत्यनारायण पाराशर के परिवार वालों को तो श्रम कानून के अंतर्गत कोई लाभ भी नहीं मिलेगा। श्रमिक पाराशर के ठेकेदार रामदेव खारोल का कहना है कि उसने अपनी क्षमता के अनुरूप इलाज के लिए पचास हजार रुपए की राशि दी है। खारोल के अनुसार हमारे अनुबंध के अनुरूप ठेका श्रमिक की मौत पर मिल प्रबंधन की कोई जिम्मेदारी है। रिजु की मिलों में अलग अलग कार्यों के लिए ठेका श्रमिक रखे गए हैं।

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