सौम्या ने गांव में शुरू किया ये बिजनेस, महिलाओं को दे रहीं रोज़गार

 
सौम्या ने गांव में शुरू किया ये बिजनेस, महिलाओं को दे रहीं रोज़गारनई दिल्ली। जाति प्रथा ने देश के माहौल को खराब कर रखा है। आधुनिकता के दौर में लोग आज भी जाति के आधार पर काम को बांटते है। ऐसी ही कई छोटी जातियां होती है जो कई सालों से जमीदारों के खेतों को संभालने का काम करते आए है। गुजरात का एक जनजाति समूह हलपतिस जो पीढ़ियों से जमीनों पर खेती करने का काम करते आया है।

कुछ साल पहले की बात करें तो गुजरात की बारडोल तालुका के एक स्कूल में कुछ परिवारों के माता-पिता आए। और टीचरों को सलाह दी कि हलपतिस जाति के बच्चों को शिक्षा न दें, उनका कहना है कि अगर ये बच्चे पढ़ने-लिखने लग जाएंगे तो हमारे खेतों की देखरेख कौन करेगा।

ये किसी फिल्म का सीन नहीं बल्कि हकीकत है आज भी गुजरात में हलपतिस नाम की जाति से जबरन खेतों में काम कराया जाता है उन्हें शिक्षा अधिकारी तक गांव वाले नहीं देते है। अगर गलती से भी कुछ और काम करने के बारें में सोचों तो पूरा गांव एक जुट होकर उसका गांव निकाला कर देता है। इस परिस्थिति से निकलने के लिए इस जनजाति ने काफी प्रयास भी किए। ये आज भी अपने पूर्वजों के नाम पर उन्हें चुप करा दिया जाता है।
सौम्या ने गांव में शुरू किया ये बिजनेस, महिलाओं को दे रहीं रोज़गार
लेकिन कानपुर में पली-बढ़ी एक लड़की इस गांव के लिए उम्मीद की एक किरण बनकर आई। लड़की का नाम है सौम्या। जोकि दिल्ली विश्वविद्यालय से अपने स्नातक वाणिज्य (ऑनर्स) की पढ़ाई को पूरा कर रही थी। उसी दौरान सौम्या ने एक एनजीओ के साथ मिलकर काम सिखा। ये एनजीओ महिलाओ के एक समूह को नया बिजनेस करने का मौका देता है और आर्थिक रुप से उसकी सहायता करता है। इसी एनजीओ की एक साथी आयुष सिन्हा ने 30 महिलाओं के समूह को मसाला बनाने का काम दिया था ,जिसे सौम्या ने भी सिखा था।

सौम्या को SBI Youth for India Fellowship की मदद से जखारडा जानें का मौका मिला जहां उन्हें इस जनजातिय समुदाय की परेशानी के बारें में पता चला। सौम्या इन लोगों की मदद करने के लिए एक ऐसा ही मसालों का बिजनेस खोलना चाहती थी, जो उनके दोस्त ने खोला था। सौम्या बताती है कि गुजरात के हर गांव में आपको हलपतिसा समुदाय की यही स्थिति देखने के लिए मिलेगी। जहां उनसे जबरन खेतों में साल भर मेहनत करायी जाती है और पैसे के नाम पर कुछ नहीं दिया जाता।

सौम्या ने गुजरात के जखारडा में भी मसालो का बिजनेस शुरू किया। सौम्या ने गांव गांव में जाकर महिलाओ और पुरूषों से इस बिजनेस में जुड़ने का आग्रह किया। लोगों ने भी सौम्या के प्रस्ताव का स्वागत किया और उसके साथ जुड़ गये। सौम्या गांव की महिलाओं के पास जाकर उन्हें पैसे कमाने के जरिए के बारें में भी बताती रहती है। सौम्या ने लोगों के बीच जागरुकता पैदा कि खेती में मजदूरी करने के अलावा भी काम है जो आपके जीवन को आसान बना सकते है। जखारडा की महिलाएं आज इतनी सक्षम हो गई है कि हर साल लगने वाले जिला मेलों में अपने मसालों को बेचने के लिए जाती है और अच्छी कमाई भी करती है।

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