ससुराल में प्रताड़ना का केस मायके में चल सकेगा

 
ससुराल में प्रताड़ना का केस मायके में चल सकेगानई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है कि लड़की के साथ ससुराल में हुई प्रताड़ना का केस मायके में भी दर्ज कराया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर ससुराल में पत्नी के साथ पति ने या अन्य ससुरालवालों ने प्रताड़ना किया है और महिला ससुराल छोड़ जहां जाकर रहती है वहां के जूरिडिक्शन में जो कोर्ट है वहां भी महिला की दहेज प्रताड़ना की शिकायत की सुनवाई होगी।

एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार कानून के जानकार नवीन शर्मा बताते हैं कि अभी तक महिला वैवाहिक विवाद के मामले में तलाक, गुजारा भत्ता आदि की मांग जहां रहती है वहां से कर सकती थी और वहां के जूरिडिक्शन वाले सिविल कोर्ट में गुहार लगा सकती थी लेकिन महिला के साथ अगर ससुराल में प्रताड़ना हुई है और मायके में ससुरालियों ने प्रताड़ित नहीं किया हो तो महिला को ससुराल के जूरिडिक्शन वाले कोर्ट में ही दहेज प्रताड़ना मामले में शिकायत और सुनवाई के लिए जाना होता था।

अब महिला जहां पनाह लेगी वहां के जूरिडिक्शन वाले कोर्ट में दहेज प्रताड़ना से संबंधित महिला की शिकायत पर मामले की सुनवाई होगी। रूपाली देवी बनाम स्टेट ऑफ यूपी से संबंधित वाद में सुप्रीम कोर्ट ने उक्त व्यवस्था दी है। 

सुप्रीम कोर्ट के सामने इसको लेकर कई मामले आए थे। ऐसे सात मामले थे जिसमें अदालत का का अलग-अलग व्यू था। वाई. अब्राहम आदि से संबंधित मामले सहित पांच मामले ऐसे थे जिनमें अदालत ने मत दिया था कि अगर पत्नी के साथ ससुराल में प्रताड़ना हुआ हो और ये प्रताड़ना पति या उसके रिलेटिव ने किया हो और महिला ने ससुराल छोड़ मायके में शरण ले ली हो तो मायके के जूरिडिक्शन वाले कोर्ट में मामला नहीं चलेगा ऐसे मामले में एक अहम बात ये थी कि पति या ससुरालियों ने महिला को उसके मायके में किसी भी तरह से प्रताड़ित नहीं किया था। इन मामलों में अदालत ने मत व्यक्त किया कि ऐसे मामले में ससुराल में अपराध हुआ है और ये अपराध पैरेंट्ल होम में जारी नहीं रहा था ऐसे में ससुराल के जूरिडिक्शन वाले कोर्ट में केस चलेगा।

ससुराल और मायके दोनों जगह प्रताड़ना हुई ऐसे में मायके के इलाके के कोर्ट का जूरिडिक्शन बनेगा
सुजाता मुखर्जी से संबंधित वाद में कहा गया कि पति ने ससुराल में महिला को प्रताड़ित किया और इस कारण महिला ससुराल छोड़ मायके आ गई और आरोप है कि वहां भी पति ने आकर उसे प्रताड़ित किया। अदालत ने माना कि अपराध प्रक्रिया की धारा-178 (3) के तहत अपराध जारी रहा था।

वहीं एक अन्य महिला सुनीता से संबंधित वाद में पति ने ससुराल में प्रताड़ित किया और जब वह पैरेंट्स के घर आई तो वहां से उसने पति को संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उसने संपर्क नहीं किया। इन मामलों में कोर्ट ने मत व्यक्त किया कि धारा-498 ए का अपराध न सिर्फ मायके में बल्कि ससुराल में भी जारी रहा था और ऐसे में मायके के जूरिडिक्शन वाले कोर्ट में मामले की शिकायत हो सकती है और कोर्ट संज्ञान ले सकता है। 

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