चुनावी मौसम में फिर गरमाया राफेल का मुद्दा, कांग्रेस-बीजेपी में ठनी, रक्षा मंत्रालय भी कूदा

 
चुनावी मौसम में फिर गरमाया राफेल का मुद्दा, कांग्रेस-बीजेपी में ठनी, रक्षा मंत्रालय भी कूदा सुप्रीम कोर्ट द्वारा राफेल लड़ाकू विमान सौदे से संबंधित विशिष्ट एवं गोपनीय' दस्तावेजों को सुनवाई के लिए मान्य करार दिये जाने के बाद रक्षा मंत्रालय ने आज दोहराया कि याचिकाकर्ता इनका इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा से जुड़े मामले में आंतरिक एवं गोपनीय विचार-विमर्श की आधी-अधूरी तस्वीर पेश करने के लिए कर रहे हैं। उच्चतम न्यायालय ने राफेल लड़ाकू विमान सौदा मामले में बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में विशिष्ट एवं गोपनीय दस्तावेजों पर केंद्र सरकार के विशेषाधिकार के दावे को खारिज कर दिया और पुनर्विचार याचिकाओं की योग्यता के आधार पर सुनवाई करने का निर्णय लिया।  कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया है कि डील में करप्शन हुआ। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती भी दे डाली। कुछ देर बाद बीजेपी की वरिष्ठ नेता और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस प्रेजिडेंट जो कह रहे हैं, यह बात सुप्रीम कोर्ट ने कहां कही है 
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि मुझे कोई बताए कि क्या सुप्रीम कोर्ट में ऐसी कोई बात हुई है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो खुद जमानत पर हैं, उन्हें कोर्ट के फैसले की गलत जानकारी देने का अधिकार किसने दिया। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल की रैली में राफेल डील को लेकर पीएम मोदी पर हमला बोला। उन्होंने कहा, मोदी जी ने पहले कहा कि मुझे प्रधानमंत्री मत बनाओ, चौकीदार बनाओ और जब राफेल की चोरी पकड़ी गई तो कह रहे हैं कि पूरा देश चौकीदार। मोदीजी, ये नहीं चलेगा। इस देश में किसान, बेरोजगार, मजदूर हैं, जिनका आपने नुकसान किया है।
न्यायालय के फैसले के बाद रक्षा मंत्रालय ने एक वक्तव्य जारी कर कहा कि याचिकाकर्ता राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा से जुड़े मामले में आंतरिक और गोपनीय विचार-विमर्श के बारे में चुनिंदा और आधी-अधूरी तस्वीर पेश करने की मंशा से इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर रहे हैं। अदालत में याचिकाकर्ताओं द्वारा पेश दस्तावेजों से इस बात की सही जानकारी नहीं मिलती कि सौदे से जुड़े विभिन्न मुद्दों का समाधान कैसे किया गया और सक्षम अधिकारी से जरूरी मंजूरी किस तरह ली गयी। यह याचिकाकर्ताओं द्वारा चुनिंदा और आधे-अधूरे तथ्य पेश करने की कोशिश है। सरकार की मुख्य चिंता राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित संवेदनशील और गोपनीय दस्तावेजों के सार्वजनिक होने को लेकर है।
वक्तव्य में कहा गया है कि पुनर्विचार याचिकाओं में याचिकाकर्ताओं ने ऐसे दस्तावेजों को पेश किया है जिनमें से कुछ को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता इसलिए केन्द्र सरकार ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि ये दस्तावेज गोपनीय हैं और पुनर्विचार याचिकाओं पर विचार के समय इनको संज्ञान में नहीं लिया जाना चाहिए। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि सरकार ने न्यायालय के आदेश के अनुसार उच्चतम न्यायालय और याचिकाकर्ताओं को जरूरी जानकारी मुहैया करायी थी। सरकार ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को भी सभी जरूरी रिकार्ड और फाइलें दी थी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार उच्चतम न्यायालय ने बुधवार के फैसले में पुनर्विचार याचिकाओं के बारे में निर्णय लेते समय इन दस्तावेजों पर विचार करने की बात कही है। पुनर्विचार याचिकाओं पर अभी सुनवाई होनी बाकी है। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि न्यायालय ने गत 14 दिसम्बर को सौदे से संबंधित रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया था।

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