उच्च शिखर पर वही समाज पहुंचता है जिस समाज के लोग संघर्ष करते हैं : लक्ष्य

 
उच्च शिखर पर वही समाज पहुंचता है जिस समाज के लोग संघर्ष करते हैं : लक्ष्य
लखनऊ। लक्ष्य की टीम ने "बहुजन जनजागरण अभियान के तहत" जिला बाराबंकी के गांव सईहारा  में  एक भीम चर्चा का आयोजन  की।

लक्ष्य कमांडर रेखा आर्या व् संघमित्रा गौतम ने नारी शिक्षा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि माता सावित्री बाई फुले भारत की प्रथम शिक्षिका व् समाज सुधारक थी |  उन्होंने अपने पति ज्योतिबा राव फुले के साथ मिलकर स्त्री अधिकारों और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए |  1852 में उन्होंने बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की |   शिक्षा में अतुलनीय योगदान के लिए देश और समाज इनका सदैव कर्जदार रहेगा |

उन्होंने कहा कि जिस समय सावित्री बाई फुले ने शिक्षा की ज्योति जलाई उस समय नारियों को शिक्षा से वंचित रखा गया  था इसके बावजूद उन्होंने नारी शिक्षा के बीडे को अंजाम तक पहुंचाया |  उनके अथक संघर्ष से  शोषित, पीड़ित, अधिकार वंचित समाज की नारियों को भी शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार मिला |  आज शिक्षा पाकर बहुजन समाज की बेटियां आईएएस, पीसीएस, जज, डॉक्टर, इंजीनियर बन गई हैं |  लक्ष्य कमांडरों ने बहुजन समाज से अपील करते हुए कहा कि वो  शिक्षा के महत्व को समझे और अपने बच्चो को विशेषतौर  से बेटियों को अवश्य शिक्षित करे ताकि वे अपने भविष्य की रचना अच्छे से कर सके |

गांव वालों ने लक्ष्य कमांडरों की प्रशंशा करते हुए कहा कि जिस प्रकार सावित्री बाई फुले ने वंचित नारियों को पढ़ने का अधिकार दिलाया,  उसी प्रकार लक्ष्य की महिला कमांडर भी वंचित, शोषितों, पीड़ितों के अधिकारों के लिए लगातार गांव गांव  जाकर संघर्ष कर रही हैं |

इस भीम चर्चा में सुमन, रेशमी, रिंकू, सावित्री देवी, आशा देवी, मीना देवी, रामरती, चन्द्रकला, सीमा देवी, मालती देवी, ज्ञान सिंह शामिल हुए |

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