घर से 18KM दूर BA फर्स्ट ईयर की परीक्षा देने जाती है ये दिव्यांग छात्रा

 
घर से 18KM दूर BA फर्स्ट ईयर की परीक्षा देने जाती है ये दिव्यांग छात्रा मध्य प्रदेश के छतरपुर के राजनगर क्षेत्र के परा तिलवां गांव की निवासी छात्रा ममता पटेल का जब जन्म हुआ था, तब से ही उसके दोनों हाथ नहीं है।

लेकिन वह पढ़ाई की इतनी शौकीन है कि उसने पैरों से ही लिखना सीख लिया। वर्तमान में यह छात्रा महाराजा कॉलेज से बीए प्रथम वर्ष की परीक्षा दे रही है, जिसमें वह उत्तर पुस्तिकाओं में पैरों से ही लिख रही है। इंटरनेट पर ममता की कुछ तस्वीरें वायरल हो रही है जिनमें लोग उसकी तारीफ कर रहे हैं।

ममता के किसान पिता देशराज पटेल और उनकी मां उर्मिला है। ममता का जन्म 2 जून 2000 को हुआ। गांव में ही ममता ने आठवीं तक की शिक्षा पूरी की। इसके बाद उसने राजनगर स्कूल से 12वीं कक्षा की परीक्षा पास की। ममता महाराजा कॉलेज में b.a. प्रथम वर्ष की आधार पाठ्यक्रम के तहत आने वाले तीन पेपरों की परीक्षा दे चुकी है। शुक्रवार के दिन ममता का राजनीति शास्त्र का पेपर था, तो वह पेपर देने आई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 19 वर्षीय छात्र ममता ने कहा कि मेरा एक बड़ा भाई और एक छोटा भाई है, जो मेरा पूरा ध्यान रखते हैं। वह मेरी पढ़ाई में मदद भी करते हैं। मैं जन्म से ही दिव्यांग हूं जिस कारण मेरे माता-पिता बहुत परेशान रहते थे। छात्र ममता बताती है कि वह माता-पिता पर बोझ नहीं बनना चाहती।

इसी कारण वह पढ़ लिखकर सरकारी नौकरी चाहती हैं। ममता की लगन को देखकर चाचा भी उसे प्रोत्साहित करते हैं। वह ममता को रोज गांव से 18 किलोमीटर दूर बाइक पर बैठाकर परीक्षा दिलाने के लिए जाते हैं।


ममता का कहना है कि उसने दिव्यांगता को चुनौती माना। उसने छोटी उम्र में पढ़ाई शुरू कर दी और बाएं पैर से लिखने का अभ्यास भी किया। शुरुआत में ममता को परेशानी आई। लेकिन वह परेशानियां धीरे-धीरे दूर हो गई। ममता की 12 साल में लिखने की स्पीड बहुत तेज हो गई और इसका नतीजा यही है कि आज बीए की परीक्षा दे रही है।

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