'सोच है न शौचालय - ये कैसे विद्यालय'

 
'सोच है न शौचालय - ये कैसे विद्यालय'
राम मिश्रा, अमेठी। जहां सोच,वहां शौचालय..., यह सरकारी नारा है, लेकिन अमेठी के अनेक शौचालय विहीन परिषदीय विद्यालयों की दुर्दशा देखकर तो यही लगता है कि इनके उद्धार को लेकर शासन के पास कोई सोच
नहीं है इसी प्रकार की स्थिति मुसाफिरखाना विकासखण्ड के धरौली-नया कोट मार्ग पर स्थित प्राथमिक विद्यालय गल्लामंडी की है शौचालय की व्यवस्था नहीं होने से विद्यालय बच्चे खुले में शौच जाने को विवश हो रहे हैं।
'सोच है न शौचालय - ये कैसे विद्यालय'

बता दे कि इस विद्यालय में नामांकित 107 विद्यार्थी आज भी शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हो रहे हैं वही अभिवावकों का कहना है जहां खुले में शौच से होने वाली बीमारियों और इसके दुष्परिणाम की जानकारी दी जाती है सरकारी विद्यालय में शौचालय की व्यवस्था नहीं हैं ऐसे में स्वच्छता अभियान की बात उचित नहीं है स्वच्छता अभियान के तहत शौचालय बनाने के नाम पर सरकार द्वारा लाखो-करोड़ों रुपये खर्च किये गये बावजूद अब तक कई स्कूलो में भी शौचालय नहीं बने हैं इसकी जानकारी अधिकारियों को है परंतु इसे लेकर गंभीर नहीं है।
'सोच है न शौचालय - ये कैसे विद्यालय'

प्राथमिक विद्यालय गल्लामंडी में पढ़ने वाले छात्रों ने बताया कि शौचालय नहीं होने से छात्रों को शौचालय जाने में बहुत ही परेशानी हो रही है मजबूरी में आसपास के खेत में जाते हैं प्रधानाध्यापक रमेश कुमार का कहना है कि स्कूल में बच्चों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाते हैं और ऐसे ही स्कूल में शौचालय नहीं है कई बार अधिकारियों को भी अवगत करा चुके हैं लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं देते हैं।

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