क्या केन्द्रीय गृहमंत्री अमितशाह कश्मीर दौरे में हुर्रियत के नेताओं से संवाद करेंगे?

 
क्या केन्द्रीय गृहमंत्री अमितशाह कश्मीर दौरे में हुर्रियत के नेताओं से संवाद करेंगे?
एसपी मित्तल 
26 जून से केन्द्रीय गृहमंत्री अमितशाह दो दिवसीय जम्मू-कश्मीर दौरे पर हैं। शाह के दौरे को लेकर अनेक संभावनाएं व्यक्त की जा रही है। शाह के दौरे से पहले जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा था कि बदली हुई परिस्थितियों में अलगाववादी नेताओं के संगठन हुर्रियत के पदाधिकारी भी सरकार से संवाद करने के लिए सहमत हो गए हैं।

राज्यपाल के बयान के बाद हुर्रियत की ओर से भी कहा गया कि यदि ठोस वार्ता होती है तो हम वार्ता में भाग लेंगे। अब सवाल उठता है कि जिन अमितशाह ने लोकसभा चुनाव में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर रहते हुए बार बार कहा कि केन्द्र में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दोबारा से भाजपा की सरकार बनने पर जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाया जाएगा वो ही अमितशाह क्या हुर्रियत के उन नेताओं से संवाद करेंगे जो कश्मीर की आजादी चाहते हैं?

हुर्रियत के नेता बार बार कहते हैं कि कश्मीर समस्या का समाधान पाकिस्तान के साथ वार्ता करने पर ही होगा। हुर्रियत के नेता चाहते हैं कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को मिला कर स्वतंत्र देश बनाया जाए। हुर्रियत के नेताओं के मंसूबे तो पूरे नहीं होंगे, लेकिन आज कश्मीर के हालात बिगाडऩे में सबसे ज्यादा भूमिका अनुच्छेद 370 के प्रावधानों की है। हालांकि मोदी के नेतृत्व में 2014 में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही हुर्रियत के नेताओं पर सख्त कार्यवाही की गई है।

पाकिस्तान से फडिंग लेने को लेकर हुर्रियत के कई नेताओं को एक्सपोज किया है। कई नेता इस समय भी जेलों में हैं। 30 मई को केन्द्रीय मंत्री की शपथ लेने के बाद यह पहला अवसर है, जब किसी राज्य की कानून व्यवस्था की स्थिति का जायजा लेने के लिए अमितशाह बाहर निकले हैं। अब अमित दिल्ली में अपने मंत्रालय में बैठ कर ही कामकाज कर रहे थे। अमित शाह के दौरे से कश्मीरियों को भी उम्मीदें हैं।

आम कश्मीरी चाहता है कि घाटी में अमन-चैन कायम हो। एक जुलाई से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा का भी जायजा लिया जाएगा। सुरक्षा बलों के अधिकारी भी गृहमंत्री के दौरे को बहुत महत्व दे रहे हैं। अमितशाह के लिए कश्मीर समस्या का समाधान एक राजनीतिक चुनौती भी है।

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