इन कामों को करने से टूट जाता है रोजा

 
इन कामों को करने से टूट जाता है रोजा
इस्लाम धर्म का पाक महीना रमजान मुस्लिम लोगों के लिए खास महत्व रखता है। पवित्र कुअरान के मुताबिक रमजान के महीने में जनन्त के दरवाजे खुल जाते हैं।

यदि चाँद का दीदार 05 मई को हुआ तब ईद-उल-फितर 04 जून को पड़ेगा। बता दें कि इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से हर साल 29 या 30 रोजे ही रखे जाते हैं।

ईद का चांद दिखने पर रोजे विदा होते हैं, जिसके अगले दिन ईद का जश्न मनाया जाता है। रमजान के विषय में जो मान्यता है उसके अनुसार रमजान इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिलक नौवां महीना होता है।

कुअरान में रमजान के पवित्र महीने में रखे जाने वाले रोजा को विशेष महत्व प्रदान किया गया है। रमजान में रोजे के दौरान मुसलमान सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक बिना पानी के रहते हैं।

रमजान को अरबी भाषा में रमादान कहा जाता है। जिसका अर्थ सूरज की गर्मी होता है। ऐसा माना जाता है कि पवित्र रमजान के महीने में रोजे रखने से पाप धुल जाते हैं।

रमजान की अवधि में रोजेदार को भूखा रहना पड़ता है। घर के बच्चों से लेकर बड़े-बूढ़े भी रमजान के रोजे को अच्छी तरह से निभाते हैं। लेकिन इस समय में डायाबिटीज से पीड़ित लोगों को अधिक सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

जिन लोगों को डायाबिटीज की समस्या होती है उन्हें रमजान के दिनों में रोजे के समय खान-पान का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। इसलिए सहरी के समय में उन्हें कार्बोहाइड्रेट जैसे चावल, चपाती, मसूर की दाल, दलिया आदि का सेवन करना चाहिए। इस दौरान जहां तक संभव हो कम से कम मात्रा में खजूर का सेवन करना चाहिए।

खजूर की जगह फल और सब्जियां लेना अत्यधिक लाभकारक साबित होता है। इसके अलावा रमजान के महीने में रोजा रखने के दौरान लोगों को कई कड़े नियमों का पालन करना पड़ता है।

जैसे रमजान के महीने में एक मुसलमान को रोजे के दौरान खान-पान से बचना चाहिए, किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करना चाहिए और सादगी से रहना चाहिए। 

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