महागठबंधन नहीं महामिलावट, जनता नहीं करेगी स्वीकार: मोदी

 
महागठबंधन नहीं महामिलावट, जनता नहीं करेगी स्वीकार: मोदीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी महागठबंधन को महामिलावट करार देते हुए कहा कि तीन दशक बाद बहुमत वाली सरकार का स्वाद चखने वाली जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए पीएम ने कांग्रेस पर वायु सेना को कमजोर करने और दूसरी कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए राफेल सौदा रद्द करने की कोशिश का आरोप लगाया। इस दौरान पीएम ने कांग्रेस की साढ़े पांच दशक की सत्ता केभोग के 55 साल और वर्तमान सरकार के कार्यकाल को 55 महीने का सेवा भाव बताया। विपक्ष की टोकाटोकी के बीच पीएम ने संस्थाओं को नष्ट करने के आरोपों पर भी कांग्रेस पर पलटवार किया और कहा कि उल्टा चोर चौकीदार को डांटे कहावत चरितार्थ हो रही है।
पीएम ने कहा कि वर्तमान सरकार की पहचान ईमानदारी, पारदर्शिता, गरीबों केप्रति संवेदना, राष्ट्रहित सर्वोपरि,  भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और तेज गति से काम के लिए है। कांग्रेस ने जहां अपनी 55 साल की सत्ता को भोग का माध्यम बनाया, वहीं हमने 55 महीने की सत्ता को सेवाभाव केरूप में इस्तेमाल किया। पहली बार जमीनी स्तर पर उस गरीब वर्ग के लिए काम हुए जिसके लिए वह खुद यहां आए हैं। हर घर बिजली, शौचालय, आवास, मुद्रा योजना, उज्जवला योजना की चर्चा करते हुए पीएम ने कहा कि सरकार आगामी आम चुनाव में जनता के सामने अपना लेखा जोखा रखेगी।
राफेल सौदे पर पीएम ने कहा कि कांग्रेस जिस प्रकार लगातार झूठ फैला रही है। पार्टी ने इतना अधिक झूठ बोला कि उसकी सच बोलने की आदत ही खत्म हो गई। उन्होंने कहा कि वह पूरी जिम्मेदारी से यह कह रहे हैं कि कांग्रेस सेना को मजबूत नहीं होने देना चाहती। यही कारण है कि सेना को बदनाम करने केलिए सत्ता में रहते यूपीए 2 सरकार के मंत्रियोंं ने सेना की ओर से झूठी तख्ता पलट की खबरें छपवाई। पांच साल में सेना के बुलेट प्रूफ जैकेट की मांग पूरी नहीं की। तीन दशक तक वायु सेना का लड़ाकू विमान नहीं दिए। अब जब राफेल से वायु सेना की ताकत बढऩे की बात है तो यह पार्टी इस सौदे को रद्द कराने में जुट गई है। पीएम ने पूछा कि आखिर कांग्रेस किस कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा कर रही है। इसी दौरान पीएम ने इस सौदे में भ्रष्टचार के आरोपों के जवाब में कह कि सौदे में दलाली न लिए जाने पर कांग्रेस कैसे विश्वास कर सकती है, जबकि उसके 55 साल की सत्ता में एक भी हथियार सौदा ऐसा नहीं हुआ जिसमें दलाली नहीं दी गई। कभी इनकेमामा को तो कभी इनके चाचा को दलाली की रकम मिली।
महागठबंधन नहीं महा मिलावट
पीएम ने विपक्ष के महागठबंधन को महा मिलावट बताया। उन्होंने कहा कि तीन दशक तक लगातर मिलावट की सरकार से ऊबी जनता ने पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार दी। इस सरकार ने जनता की अपेक्षाओं केअनुरूप काम भी किए। ऐसे में जनता ऐसे महामिलावट को क्यों मौका देगी जिसे एक दूसरे का चेहरा तक पसंद नहीं है। केरल में ये एक दूसरे का मुंह नहीं देखना चाहते तो यूपी में महामिलावट की कोशिश कर रहे दल को ही गठबंधन से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि चुनावी साल में कोशिश करने में हर्ज नहीं है, मगर जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी।
राजदारों के आने से कांग्रेस बेचैन
पीएम ने अगस्ता वेस्टलैंड मामले में बिचौलिये क्रिश्चयन माइकल सहित दो अन्य लोगों केभारत आने की चर्चा करते हुए कहा कि उन्हें समझ आ रह है कि कांग्रेस क्यों बेचैन है। तीन राजदारों के भारत आने से उनकी बेचैनी बढऩी स्वाभाविक है। इसी बेचैनी में चुपचाप बिचौलिये को पत्र पहुंचाए जा रहे हैं। अभी और राजदारों को लाया जाना है और यह बेचैनी अभी और बढऩे वाली है।
उल्टा चोर चौकीदार को डांटे
संस्थाओं को नष्ट करने और निजी हमले का भी पीएम ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि संस्थाओं को  नष्टï करने के आरोपों पर उन्हें एक कहावत उल्टा चोर कोतवाल को डांटे की याद आ रही है। जिस कांग्रेस ने सौ राज्य सरकारों को बर्खास्त किया। महाभियोग के बहाने न्यायपालिका को धमकाने की कोशिश की। जो निष्पक्ष चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को खत्म करने पर तुली है और जिसके एक पूर्व पीएम ने नीति आयोग केजोकरों का समूह कहा, वह हम पर संस्थाओं को बर्बाद करने का आरोप लगा रहा है।
ट्वीट कर रो रहे भागने वाले
पीएम ने आर्थिक अपराध में देश छोड़ कर भागने वालों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इनमेंं से एक ट्वीट करके रो रहे हैं। कह रहे हैं कि उन पर 9000 करोड़ का बकाया था, मगर मोदी सरकार  ने 13000 करोड़ जब्त कर लिए। पीएम ने कहा कि पहले नामदारों ने फोन बैंकिंग से अपने लोगों को ऋण दिलाया। अपने कार्यकाल के अंतिम छह सालों में आजादी से ले कर वर्ष 2008 के दौरान दिए गए ऋण से भी ज्यादा ऋण दिया। हमने तो 5000 करोड़ रुपये उल्टे वसूले हैं।
गरीब कैसे दे रहा चुनौती
पीएम ने कहा कि उन पर निजी हमले और हिकारत का भाव उन्हें समझ मेंं आता है। सत्ता को अपनी स्वाभाविक जागीर मानने वाले यह हजम नहीं कर रहे कि ऐसा गरीब जो ठीक से दिल्ली में नहीं घूमा वह हमें कैसे चुनौती दे सकता है।  इनके सत्ता का नशा कभी उतरता ही नहीं।

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