नादिया मुराद को नहीं याद, 3 महीने कैद में कितनी बार हुआ बलात्‍कार

 
नादिया मुराद को नहीं याद, 3 महीने कैद में कितनी बार हुआ बलात्‍कार उत्तरी इराक में अपना बचपन गुजारने वाली यह लड़की आज 25 बरस की है। उसके जहन में उसकी जिंदगी के अब तक गुजरे तकरीबन 8125 दिनों की अच्छी बुरी यादें होनी चाहिएं, लेकिन उसे याद है तो सिर्फ वह तीन महीने, जो उसने इस्लामिक स्टेट के चरमपंथियों की कैद में गुजारे।

वह उन 90 दिनों की यातनाओं को याद करके सिहर उठती है और रूंधे गले से दुनिया से अपील करती है कि उसके जैसी बाकी लड़कियों के प्रति इस तरह बेपरवाह न रहें।

हम बात कर रहे हैं नादिया मुराद की, जिन्हें हाल ही में नोबेल का शांति पुरस्कार प्रदान किया गया। उन्हें यह पुरस्कार कांगो के एक स्त्री रोग विशेषज्ञ डेनिस मुकवेगे के साथ संयुक्त रूप से दिया गया। युद्धों अथवा सशस्त्र अभियानों के दौरान यौन हिंसा को हथियार की तरह इस्तेमाल करने का पुरजोर विरोध करने वाली नादिया यजीदी समुदाय की हैं जो दुनिया के सबसे पुराने मजहबों में से एक माना जाता है।

उत्तरी इराक में सीरिया की सीमा से सटे शिंजा इलाके के पास कोचू गांव में अपने छह भाइयों और भरे पूरे परिवार के साथ रहने वाली नादिया मुराद ने बलात्कार के खिलाफ जागरूकता फैलाने का काम किया, लेकिन उससे पहले उन्होंने इस घिनौने लफ्ज की जलालत को पूरे तीन महीने तक अपने शरीर पर झेला।

उन्हें शिकायत है कि वह तेल का जखीरा या हथियारों की खेप नहीं थीं, इसलिए अन्तरराष्ट्रीय समुदाय ने उन्हें चरमपंथियों के चंगुल से छुड़ाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया।

आईएस के लड़ाके अगस्त 2014 में नादिया के गांव में घुस आए और तमाम पुरूषों और बूढ़ी महिलाओं को मौत के घाट उतारने के बाद नादिया और उनके जैसी बहुत सी लड़कियों को बंधक बना लिया। उन्हें मोसुल ले जाया गया। नादिया को यह तक याद नहीं कि तीन महीने की कैद के दौरान उनके साथ कितने लोगों ने कितनी बार बलात्कार किया।

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