क्या सनातन संस्कृति वाला भारत पश्चिम की खुली हवा खाने को तैयार है?

 
क्या सनातन संस्कृति वाला भारत पश्चिम की खुली हवा खाने को तैयार है?एसपी मित्तल 
कहा तो यही जाता है कि भारत सनातन संस्कृति वाला देश है। इसी संस्कृति मंे शक होने पर सीता माता को अग्नि परीक्षा देनी पड़ी थी। लेकिन 27 सितम्बर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शादी के बाद गैर मर्द से शारीरिक संबंध अब किसी औरत के लिए अपराध नहीं होगा। 

सीजेआई दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ का माानना रहा कि शादी हो जाने से पत्नी, पति की सम्पत्ति नहीं हो जाती। जितना स्वतंत्रता का अधिकार पुरुष को है, उतना ही महिला को भी है। इसी के साथ कोर्ट ने आईपीसी की धारा 497 को असंवैधानिक घोषित कर दिया। 

अब तक इस धारा मंे जुर्माना और सजा का प्रावधान था। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कई मायने में महत्वपूर्ण है। निःसंदेह इससे  महिलाओं के अधिकारों में वृद्धि होगी और महिलाएं भी अपने विचारों के अनुरूप जीवन व्यतीत कर सकेंगी। यानि अब यह कहावत बदल जाएगी कि पत्नी तो पति के पैर की जूती होती है। पतियों को भी अब पता चलेगा कि पत्नी क्या होती है? जिस तरह पश्चिम के देशों में किसी समुन्द्र के किनारे महिलाएं जिस तरह नजर आती हैं, उसी तरह अब भारत में महिलाएं खुली हवा का आनंद ले सकेंगी। पश्चिम की संस्कृति में किसी भी पति को अपनी पत्नी की स्वतंत्रता पर कोई ऐतराज नहीं होता है। वहां दोनों के समान अधिकार है। 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अनेक महिलाएं अत्याचार से भी बचेंगी। लेकिन सवाल उठता है कि क्या सनातन संस्कृति को मानने वाली भारतीय महिलाएं खुली हवा का आनंद ले सकती हैं? पति कैसा भी नशेड़ी हो लेकिन पत्नी तो उसी के लिए करवा चैथ का व्रत करती है। पति अपने दफ्तर या अन्य किसी भी स्थान पर गुल खिलाए, लेकिन भारतीय पत्नी तो पति को ही परमेश्वर मानेगी। पति की सफलता के लिए न जाने कितने व्रत रखे जाते हैं। अब पश्चिम के लोग भी मानने लगे हैं कि समाज को बनाए रखने में भारत की सनातन संस्कृति ही अच्छी है। 

इसलिए हमारे वेद ग्रंथों पर पश्चिम के देशों में शोध हो रहा है। सनातन संस्कृति तो महिला को देवी का दर्जा देती है। यहां तक कि कोई पिता कन्या दान नहीं करता है तो उसे मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती। यानि जिस संस्कृति में महिलाओं का इतना सम्मान है, उसी देश में कहा जा रहा है कि शादी के बाद गैर मर्द से शारीरिक संबंध बनाना किसी महिला के लिए अपराध नहीं होगा। देखना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को सनातन संस्कृति वाला भारतीय समाज किस प्रकार से ग्रहण करता है। 
(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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