इस्लाम ने आज से चौदह सौ साल पहले भ्रूण हत्या को हराम करार दिया

 
इस्लाम ने आज से चौदह सौ साल पहले भ्रूण हत्या को हराम करार दियालुधियाना। बेटियां अल्लाह की रहमत है। ये किस्मत वालों के घर में ही जन्म लेती हैं। कोख में बच्चियों का कत्ल करने वाले समाज के ही नहीं बल्कि खुदा के भी मुजरिम है। ये विचार आज स्थानीय जामा मस्जिद में जुमे की नमाज से पहले नमाजियों को संबोधित करते हुए शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने व्यक्त किए।

शाही इमाम ने कहा कि एक अच्छा समाज उस समय तक पूर्ण नहीं हो सकता जब तक उसमें बेटियों को बेटों के बराबर हक नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि अल्लाह के प्यारे नबी हजरत मुहम्मद सल्ललाहु अलैहीवसल्लम ने बेटी को अल्लाह की रहमत बताया और आज से चौदह सौ वर्ष पूर्व भ्रूण हत्या को हराम करार दिया और बाप की संपति में बेटी को हिस्सेदार बताया। शाही इमाम ने कहा कि इस्लाम धर्म में बेटियों को उच्च शिक्षा दिलवाने का आदेश दिया गया है।

उन्होंने कहा कि बेटियों और बेटों में भेद-भाव करने वाले लोग इंसानियत के दर्जे में नहीं आते। मां-बाप की सेवा करने का आदेश देते हुए शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान ने कहा कि सारा संसार ये कहता है कि मां के पैरों तले स्वर्ग है लेकिन हम ये भूल जाते है कि बाप जन्नत का दरवाजा है। जो लोग मां से तो प्रेम करते हैं लेकिन बाप की सेवा नहीं करते वह भी खुदा को राजी नहीं कर सकते। क्योंकि अल्लाह ताला की रिजा मां-बाप की रजामंदी में है। शाही इमाम ने कहा कि जो लोग भी धनी और सम्पन्न होने के बावजूद अपने मां-बाप को वृद्ध आश्रम में छोड़ कर आते है वह कभी सुखी नहीं रह सकते और वह ये भूल जाते है कि वो भी आने वाले समय में वृद्ध होने वाले है। शाही इमाम ने कहा कि वृद्ध आश्रम उन लोगों के लिए बनाए गए है जो कि बिल्कुल ही बेसहारा है ना कि उनके लिए कि जिनकी औलाद धनवान है। 

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