अलगाववादियों के बंद से कश्मीर घाटी में जनजीवन प्रभावित

 
अलगाववादियों के बंद से कश्मीर घाटी में जनजीवन प्रभावितजम्मू एवं कश्मीर के पुलवामा जिले में नागरिकों की हत्याओं के खिलाफ अलगाववादियों के बंद से जनजीवन प्रभावित है। अलगाववादी धड़े संयुक्त प्रतिरोध नेतृत्व (जेआरएल) ने बंद का आह्वान किया है। वहीं, शनिवार को आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ के बाद पुलवामा जिले के सिरनू गांव में सुरक्षा बलों के साथ संघर्ष में सात नागरिक मारे गए और 35 अन्य घायल हो गए थे। घाटी में रविवार को प्रशासन ने कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी सुरक्षा व्यवस्था की है और सार्वजनिक परिवहन सड़कों से नदारद हैं।
दक्षिण कश्मीर जिलों अनंतनाग, पुलवामा, कुलगाम और शोपियां में दूसरे दिन भी तनाव की स्थिति है जहां विरोध प्रदर्शन का असर अधिक था। राज्यपाल सत्य पाल मलिक ने कश्मीर के संभागीय आयुक्त बसीर अहमद खान के नेतृत्व में शनिवार की हत्याओं की जांच का आदेश दिया है। अलगाववादियों ने सोमवार को श्रीनगर में सेना के 15 कॉर्प्स के बदामी बाग मुख्यालय में विरोध मार्च का आह्वान किया है।
अलगाववादी नेताओं सैयद अली गिलानी और मीरवाइज उमर फारूक को नजरबंद कर दिया गया है और मुहम्मद यासीन मलिक हिरासत से बचने के लिए अंडरग्राउंड हो गए हैं। दक्षिणी कश्मीर के इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं और घाटी के कई अन्य जिलों में इंटरनेट की गति धीमी कर दी गई है। घाटी और जम्मू क्षेत्र के बीच रेल सेवाएं रविवार को दूसरे दिन भी रद्द रहीं।

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