तीन तलाक पर फिर आ सकता है अध्यादेश?

 
तीन तलाक पर फिर आ सकता है अध्यादेश? नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी सरकार का तीन तलाक संबन्धी विधेयक एक बार फिर से राज्यसभा में लटक गया है और ऐसे में इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि मोदी सरकार तीन तलाक के संबंध में फिर अध्यादेश लाएगी।
सूत्रों के अनुसार केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने ऐसे संकेत देते हुए कहा कि नियम के अनुसार संसद का शीतकालीन सत्र बुधवार को समाप्त हो गया और संसद में पारित नहीं होने के कारण तीन तलाक अध्यादेश समाप्त हो गया है। नियम है कि अध्यादेश लाने के बाद इसे पहले पडऩे वाले संसदीय सत्र में ही पेश करना पड़ता है अन्यथा छह माह बाद यह अपने आप समाप्त हो जाता है। अब यदि कोई तीन तलाक देगा तो यह अपराध नहीं रहेगा, न ही तलाकशुदा महिला को संरक्षण देने की कोई बात रहेगी।
इस विधेयक का मकसद मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से संरक्षण देना था। सरकार ने लोकसभा में इस विधेयक को पास करवा लिया था। लेकिन सरकार विपक्ष के विरोध के कारण यह विधेयक राज्यसभा में नहीं रख पाई। अब राज्यसभा का सत्र भी समाप्त हो गया है जिससे तीन तलाक को अपराध बनाने वाला अध्यादेश भी स्वत: निरस्त हो गया।
तीन तलाक अब अपराध नहीं
अब सरकार के लिए समस्या यह है कि इस अध्यादेश को नए सिरे से लाना पड़ेगा। मोदी सरकार ने तीन तलाक अध्यादेश 20 सितंबर को घोषित किया था। अब सरकार इस बारे में दोबारा अध्यादेश लाएगी ताकि 2019 के चुनाव के दौरान यह प्रभावी रहे। लेकिन समस्या यह है कि दोबरा अध्यादेश की राह आसान नहीं होगी। दरअसल सुप्रीम कोर्ट इससे पहले एक मामले में कह चुका है कि अध्यादेश की पुनर्घोषणा संविधान के साथ फ्राड (धोखाधड़ी) है। कोर्ट ने यह टिप्पणी 2017 में बिहार के एक मामले में की थी, जहां अध्यादेश खत्म होने के बाद एक के बाद एक तीन अध्यादेशों के जरिये एक संस्थान में कर्मचारियों को रखा जाता रहा।

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