बूढ़ा चौकीदार नहीं चुका पाया बिल तो अस्पताल में 113 दिन बनाकर रखा

 
बूढ़ा चौकीदार नहीं चुका पाया बिल तो अस्पताल में 113 दिन बनाकर रखा इंदौर। निजी अस्पताल (बॉम्बे अस्पताल) में इलाज कराना एक गरीब परिवार को महंगा पड़ गया। मरीज के ठीक होने के बाद अस्पताल ने दो लाख रुपए का बिल थमा दिया। परिवार इतनी अधिक राशि नहीं चुका पा रहा था। यह जानकारी मिलने के बाद डॉक्टर के डिस्चार्ज लेटर के बाद भी अस्पताल में ही रखा गया। 

मरीज 6 दिसंबर से जनरल वार्ड में 'बंधक' बनाकर रखा गया। पत्नी रोज रिटायरमेंट से मिलने वाली राशि से बकाया चुकाने की मिन्नत करती रही। 

नई दुनिया की रिपोर्ट के अनुसार गुरुवार को इस बात का हल्ला मचने पर अस्पताल प्रबंधन ने बिना बिल जमा करवाए ही मरीज को एंबुलेंस से घर भिजवा दिया। पति को अचानक घर आया देख पत्नी की आंखें भर आई।

मरीज शर्मा को अस्पताल में भर्ती रहने के कारण तीन माह से वेतन भी नहीं मिल पाया। इलाज के बाद भी 121 दिन से मरीज व उसका परिवार आर्थिक तंगी के साथ ही मानसिक प्रताड़ना भी झेल रहा था। नर्मदा विकास संभाग क्रमांक 8 में चौकीदार चंद्रशेखर शर्मा की तबीयत खराब होने पर 2 नवंबर 2018 को उन्हें बॉम्बे अस्पताल में भर्ती किया गया। 

उस समय परिजनों ने 20 हजार रुपए जमा कराए। अस्पताल में इलाज प्रारंभ हुआ। एक माह के बाद 6 दिसंबर को मरीज के ठीक होने पर उसे जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।

जब अस्पताल ने उन्हें बिल थमाया तो परिजन सकते में आ गए। 8 दिसंबर को अस्पताल ने 2 लाख 8 हजार रुपए बकाया बताकर उसे जमा करने को कहा। परिजनों ने मुख्यमंत्री सहायता योजना से 75 हजार रुपए की सहायता ली। घर में जो भी पैसा था, वह दवाई में खर्च हो गया। बेटे राहुल शर्मा क्लीनर है। 

उसने बताया कि घर में रखे लगभग एक लाख रुपए गोली-दवाई में खर्च हो गए। अब और रुपए नहीं हैं। पिताजी के दिसंबर में रिटायर होने पर राशि चुकाने को कहा लेकिन जनरल वार्ड से छुट्टी नहीं दी गई। जनरल वार्ड में भर्ती रहने पर दोनों टाइम खाना व चाय दी जा रही थी।

अस्पताल ने बिल नहीं चुकाने पर मरीज को जनरल वार्ड में भर्ती कर दिया था। इसका 28 मार्च तक का बिल 51 हजार 65 रुपए हो चुका है। अब बकाया बिल भी अस्पताल प्रबंधन ने जोड़ दिया। जनरल वार्ड में बकायदा मरीज शर्मा को दोनों समय डाइट के अनुसार भोजन, दोनों समय चाय आदि दी गई।

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