दुनिया में कुछ ऐसी जगहें भी हैं जहां से किसी दूसरी दुनिया में प्रवेश संभव!

 
दुनिया में कुछ ऐसी जगहें भी हैं जहां से किसी दूसरी दुनिया में प्रवेश संभव!ध्रुव गुप्त 
कहा जाता है कि हमारी दुनिया में कुछ ऐसी जगहें भी हैं जहां से किसी दूसरी दुनिया में प्रवेश संभव है। दुनिया भर के आध्यात्मिक साहित्य ऐसे उल्लेखों से भरे पड़े हैं कि पृथ्वी पर कुछ ऐसी रहस्यमय, लेकिन अदृश्य गुफाएं हैं जिनमें प्रवेश करते ही कोई दूसरी दुनिया या लोक में पहुंच जा सकता है। इसी रहस्यमय रास्ते से दूसरी दुनिया के लोग भी कभी-कभी इस पृथ्वी पर आते रहे हैं।

अपने देश में हिन्दू और बौद्ध योगियों ने अरुणाचल प्रदेश, तिब्बत और उत्तराखंड में ऐसी कुछ अदृश्य गुफाओं के दावे किए हैं। विज्ञान इसे स्वीकार नहीं करता, लेकिन इतना तो वह भी मानता है कि इस पृथ्वी पर ऐसे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड भी है जिनमें प्रवेश करते ही वस्तुऐं गायब हो जा सकती हैं। दूसरी दुनिया में प्रवेश के ज्यादातर दावे साक्ष्य के अभाव में प्रमाणित नहीं किए जा सकते, लेकिन उनमें एक सबसे दिलचस्प और विश्वसनीय दावा इंग्लैंड से बारहवीं सदी में आया था। वहां हेनरी द्वितीय के शासनकाल में मेरी डी उल्पिट्स नामक स्थान पर गहरी हरी त्वचा वाले एक युवक और एक युवती देखे गए थे। उस सदी के विख्यात संत विलियम ऑफ न्यूवर्ग अपनी एक विश्वप्रसिद्ध कृति हिस्तोरिया रेरम एंगलिकैरम' में इस घटना का जिक्र करते हुए लिखा है कि मनुष्यों जैसे हाथ-पांव और गहरी हरी त्वचा वाले उन दोनों के कपडे विचित्र और कुछ अलग पदार्थ से बने थे। किसान उन्हें पकड़कर गांव के प्रधान के घर ले गए। वहां कुछ ही अरसे बाद दोनों की त्वचा के रंग बदलने लगे। युवक कुछ अरसे बाद बीमार होकर मर गया। खूबसूरत युवती से लीन के सम्राट ने शादी कर ली।

बाद में अंग्रेजी सीखने के बाद युवती ने बताया कि किसी दूसरी दुनिया के वे भाई-बहन एक दिन भेड़ चराते हुए एक गुफा में प्रवेश कर गए। गुफा से उठती घंटियों की सुरीली आवाज़ का पीछा करते हुए वे न जाने कैसे इस दुनिया में पहुंच गए। वापस लौटने के लिए उन्होंने उस गुफा-द्वार की बहुत तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। अपनी दुनिया के बारे में उसने बताया कि वहां इस दुनिया जैसी गर्मी और प्रकाश नहीं है। वहां हमेशा सौम्य और शीतल रौशनी बिखरी रहती है। उसकी दुनिया के पास यहां के जैसी एक प्रकाशवान दुनिया भी है लेकिन बीच में एक अगम्य नदी होने के कारण कोई वहां जा नहीं पाता। संत विलियम ऑफ न्यूवर्ग के अलावा इस घटना का उल्लेख राल्फ ऑफ कॉगशेल', जारवेस ऑफ टिलबरी तथा आगस्तियन न्यूबर्ग ने भी अपनी कृतियों में करते हुए कहा है कि उनकी तार्किक समझ इसे मानने को तैयार नहीं थी, लेकिन घटना के प्रामाणिक साक्ष्यों और विवरणों के बाद पारलौकिक विषयों पर उनकी दृष्टि ही बदल गई।

हमारी सृष्टि ऐसे असंख्य रहस्यों से भरी पड़ी है। वहां तक विज्ञान की पहुंच बहुत सीमित है, लेकिन उसकी हठधर्मिता बहुत बड़ी। क्या यह ज़रूरी नहीं कि विज्ञान दुनिया के इस और दूसरे तमाम अनसुलझे रहस्यों को सिरे से खारिज करने की ज़िद और जल्दबाजी छोड़कर उन्हें सुलझाने की दिशा में सकारात्मक कोशिशें करे ?
(लेखक पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं)

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