पिता के संकल्प को इस बेटी ने बनाया अपना लक्ष्य और हो गई PSC में सिलेक्ट

 
पिता के संकल्प को इस बेटी ने बनाया अपना लक्ष्य और हो गई PSC में सिलेक्टनीमच, एमपी। मनासा तहसील के छोटे से गांव हाड़ी पिपलिया की टीना मालवीय ने सामाजिक बदलाव का नया संदेश दिया है। शनिवार काे उनका चयन नायब तहसीलदार पद के लिए हुआ। इस बदलाव का संकेत टीना के पिता मुकेश मालवीय ने 15 साल पहले ही दे दिया था। 

उन्होंने समाज के लोगों से कहा था- बेटियों को गलत काम में न धकेंले, एक दिन यही नाम रोशन करेंगी और आपको गर्व की अनुभूति कराएंगी। उनकी यह बात बेटी ने अपने परिश्रम के बूते पर साबित भी कर दी।

यह उपलब्धि सामान्य नहीं, असामान्य है। दरअसल मालवीय उसी बांछड़ा समाज से हैं जिसे अब तक गंदे काम और परंपरा के कारण ही जाना जाता रहा है लेकिन अब धारणा बदल रही है। यह मुकेश जैसे परिपक्व विचारधारा वाले लोगों के कारण ही संभव हो पा रहा है। बता दें कि मालवीय के गांव में बांछड़ा समाज के 50 से ज्यादा परिवार रहते हैं जहां लंबे समय से बेटियों से गंदा काम कराने की परंपरा रही है।

हमारे समाज में परंपरा के नाम पर बरसों से कई परिवार गलत काम में लिप्त रहे। यह पिता को अच्छा नहीं लगता था। वे खुद तो ज्यादा नहीं पढ़ सके लेकिन उन्होंने बदलाव का संकल्प लेकर शुरुआत अपने ही परिवार से की। मेहनत के पसीने से खेत सींचे और हम 6 भाई-बहनों काे खूब पढ़ाया। इनमें मैं दूसरे नंबर की हूं। लक्ष्य तय था इसलिए पिता की सीख पर आगे बढ़ते रहे। प्राइमरी से हाईस्कूल की पढ़ाई गांव के ही सरकारी स्कूल में हुई। हायर सेकंडरी मनासा के कन्याशाला से पास की। 10वीं बोर्ड में 84 फीसदी अंक मिले तो 12वीं (विज्ञान संकाय) में 78 फीसदी अंक। 3 साल इंदौर में कांपिटिशन एग्जाम की तैयारी की। 

इस दौरान जब भी मैं गांव आती थी तो मां कोकिलाबाई मनोबल बढ़ाती थीं। बड़ी बहन मंदसौर में नर्स हैं और छोटी एमपीपीएससी की तैयारी कर रही है। बड़ा भाई पिंकेश स्नातक की पढ़ाई कर रहा है तो उनसे छाेटे 11वीं व सबसे छोटा 10वीं में है। पिता की ही तरह शासकीय सेवा के साथ मेरा प्रयास भी समाज की बेहतरी के लिए रहेगा। समाज के अन्य बच्चों को को भी मोटिवेट करेंगे। (जैसा कि नायब तहसीलदार पद के लिए चयनित टीना ने बताया)

इस बदलाव का हिस्सा अन्य परिवार भी बन रहे हैं। बर्डिया की सोनालिका पिता विक्रम सोलंकी और नंदनी पिता अमरलाल मालवीय का चयन सॉफ्टवेयर इंजीनियर पद के लिए हुआ। दोनों बैंगलुरू में जॉब के लिए चुनी गईं हैं। युवतियों कहती हैं- अब समाज को नई दिशा देने का वक्त है। खुद को हीनभावना से ना देखें। पढ़ेंगे तभी, आगे बढ़ेंगे।

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