कभी गरीबी की मार झेल रही ये महिला अब हर महीने कमाती है 13 लाख रुपए

 
कभी गरीबी की मार झेल रही ये महिला अब हर महीने कमाती है 13 लाख रुपएरायपुर। मुश्किलें और संघर्ष से भरे जीवन पथ पर जुनून के साथ कुछ कर गुजरने की चाहत रखने वाले आखिरकार आगे बढ़ ही जाते हैं। वे अपने कर्म की बदौलत खुद की ही नहीं, बल्कि समाज की तस्वीर भी बदल देते हैं। ऐसी ही महिला हैं आरंग विकासखंड की ग्राम अमेरी की रत्ना वर्मा।

विपरीत परिस्थितियों में उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू कर खुद को संभाला, उसके बाद मजदूर परिवार की महिलाओं को भी आर्थिक रूप से मजबूत बनाया।

आजीविका मिशन के तहत स्वसहायता समूह बनाकर मशरूम उत्पादन और जैविक दवाएं बनाकर हर महीने 13 लाख रुपये तक कमा रही हैं। उनकी काबिलियत को देखते हुए उन्हें कृषि मित्र नियुक्त किया गया है। हालांकि इनके समूह में लगभग 13 महिलाएं हैं, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से 50 से अधिक परिवारों को इनके व्यवसाय का लाभ मिल रहा है।

नई दुनिया के अनुसार रत्ना वर्मा बताती हैं- घर की माली हालत ठीक नहीं थी। गृहस्थी की गाड़ी जैसे-तैसे चल रही थी। जब लगा कि कुछ किए बिना कुछ होने वाला नहीं है तो घर में ही कुछ करने की सोची। इसी दौरान गांव में किसी ने बताया कि मशरूम की खेती कर अच्छी आमदनी की जा सकती है। काम तो शुरू किया, लेकिन पैसे की कमी आड़े आ गई। इसके बाद आजीविका मिशन बिहान से जुड़ी। स्व सहायता समूह खुशी बनाई और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को जोड़ा। साढ़े चार हजार रुपये की आय पहले महीने हुई। तब इसकी बिक्री सिर्फ लोगों के घरों तक समिति थी।

मशरूम की पैकेजिंग कर इसकी आपूर्ति होटल और दुकानों में करने लगीं। इससे आय में इजाफा होने लगा। क्वॉलिटी होने के कारण इसकी डिमांड इस कदर बढ़ गई कि हर महीने 13 लाख रुपये की आय होने लगी। इनके मशरूम की डिमांड के लिए एडवांस में बुकिंग का सिलसिला भी शुरू हो गया।

मशरूम का अचार, मशरूम का पोषण आहार, पाउडर व फेस पैक आादि भी तैयार करने लगी हैं। समूह के प्रोडक्ट को और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए बिहान योजना के माध्यम से पैकिंग, लेबलिंग सहित बाजार भी उपलब्ध कराया जाने लगा।

रत्ना वर्मा ने बताया कि एक मॉडल स्वसहायता समूह के रूप में बिहान बाजार, कृषि मेला, लोक सुराज व मिशन 25-25 कार्यक्रम में मशरूम उत्पाद का स्टाल वे लगा चुकी हैं। रत्ना वर्मा अपने गांव में कृषि मित्र के रूप में नियुक्त हैं। वे घर-घर जाकर महिलाओं को स्वरोजगार के करने के तरीके बतातीं हैं। इसके अलावा उन्नतशील खेती-किसानी के लिए लोगों को प्रेरित भी कर रही हैं।

वे बताती हैं कि गोबर, गौमूत्र, पेड़ों की पत्तियों से जैविक दवाइयां जैसे निमास्त्र, ब्रम्हास्त्र बनाती हैं। एक मास्टर ट्रेनर के रूप में 1200 से अधिक महिलाओं को ट्रेंड कर चुकी हैं।

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