राम मंदिर को लेकर सरकार पर विहिप व संघ का दबाव

 
राम मंदिर को लेकर सरकार पर विहिप व संघ का दबावनई दिल्ली। राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। लोकसभा चुनाव के नजदीक आते ही यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। वहीं इस सियासत के बीच आरएसएस, विहिप समेत अन्य अनुषांगिक संगठन आंदोलन को धार देने के लिए खुलकर सामने आ गए हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 25 नवंबर को अयोध्या, नागपुर और बेंगलुरु में जनाग्रह रैली निकालने का फैसला किया है। जिसका मकसद अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए जनता का समर्थन जुटाना होगा। इन सभी जगहों पर होने वाले जन आंदोलन रैली में करीब 2 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, कार्यक्रम का आयोजन विश्व हिंदू परिषद और संत समाज करेगा, लेकिन हर रैली मे संघ का एक बड़ा पदाधिकारी भी मौजूद रहेगा।
पूरा संत समाज होगा शामिल 
अंतिम रैली नौ दिसंबर को दिल्ली में होगी। जिसे ऐतिहासिक बनाने के लिए पूरा संत समाज और आरएसएस के दिग्गज पदाधिकारी भी शामिल होंगे। इस रैली में ही अहम घोषणाएं होने की उम्मीद है। इस रैली को निकालने का फैसला ऐसे वक्त में किया है जब सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि जमीन विवाद पर सुनवाई को जनवरी 2019 तक के लिए टाल दिया है।
गांवों में जनसंपर्क करेगी विहिप
बता दें कि राममंदिर आंदोलन के लिए एक बार फिर से माहौल बनाने में विहिप जुट गई है। उनका प्रयास है कि एक बार फिर से 90 के दशक जैसा माहौल बनाया जा सके। इसके लिए विहिप पदाधिकारियों द्वारा गांवों में जनसंपर्क का फैसला लिया गया है। वह ग्रामीणों के बीच जाकर मंदिर निर्माण को लेकर उनसे चर्चा करेंगे और बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी इस आंदोलन में जोड़ा जाएगा।
-सांकेतिक तस्वीर 

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