सांसद नुसरत जहां की दुर्गा पूजा पर ऐतराज क्यों?

 
सांसद नुसरत जहां की दुर्गा पूजा पर ऐतराज क्यों?एसपी मित्तल 
हिन्दू उद्योगपति से विवाह करने वाली फिल्म अभिनेत्री और टीएमसी की सांसद नुसरत जहां की धार्मिक गतिविधियों को लेकर अब देवबंद के कुछ उलेमाओं ने ऐतराज जताया है। 7 अक्टूबर को आए बयानों में उलेमाओं की ओर से कहा गया कि नुसरत जहां इस्लाम धर्म के विरुद्ध आचरण कर रही हैं। यदि नुसरत जहां इस्लाम धर्म के विरुद्ध काम कर रही हैं तो उन्हें अपना नाम बदल लेना चाहिए।

जिस काम के लिए इस्लाम धर्म इजाजत नहीं देता उसे नुसरत जहां को नहीं करना चाहिए। नुसरत अपने इस कृत्य से इस्लाम को बदनाम कर रही हैं। इस्लाम में अल्लाह के सिवा किसी की भी पूजा नहीं की जा सकती। इस्लाम के अनुरूप आचरण करने वाला ही मुसलमान हो सकता है। उलेमाओं का यह बयान नवरात्र में नुसरत जहां द्वारा कोलकाता में अपने पति के साथ नृत्य करने और ढोल बजाने को लेकर आया है। नुसरत जहां हिन्दू संस्कृति के अनुरूप मांग में सिंदूर भरकर गले में मंगलसूत्र भी पहनती हैं।

बंगाली संस्कृति के अनुरूप ही नवरात्र में नुसरत जहां ने दुर्गा पूजा भी की। अब नुसरत की इस धार्मिक प्रवृत्ति पर ही उलेमाओं को ऐतराज है। यह बात अलग है कि कोलकाता में ऐसे दुर्गा पांडाल भी बने हैं, जिसमें सर्वधर्म के चिन्ह अंकित किए गए हैं। एक पांडाल के निकट ही नमाज भी अदा की जा रही है। इस पांडाल में दुर्गा प्रतिमा के सामने सभी धार्मिक गतिविधियां हो रही हैं।

सभी धर्मों के लोग इस पांडाल में अपने अपने धर्म के अनुरूप काम कर रहे है। हालांकि अब इसको लेकर राजनीति गरमा गई है। जहां तक टीएमसी की सांसद नुसरत जहां की धार्मिक गतिविधियों के विरोध का सवाल है तो नुसरत जहां पूर्व में भी ऐसी धार्मिक गतिविधियां करती रही हैं। उन्होंने पहले भी कहा है कि उन्हें किसी के ऐतराज का डर नहीं है क्योंकि वे एक अच्छे इंसान के तौर पर काम कर रही हैं। उलेमाओं के ताजा ऐतराज पर भी नुसरत ने कहा कि मैं सभी धर्मों का सम्मान करती हूं।
(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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