पार्ले और बजाज को हमारा सलाम, एक नई शुरुआत का स्वागत!

 

ध्रुव गुप्त
अभी कुछ ही दिनों पहले लगता था कि समाज में नफ़रत और सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने वाले न्यूज़ चैनलों का बहिष्कार कर हम उन्हें सबक सिखा सकते हैं।ऐसा करने से उन चैनलों की टी.आर.पी गिरेगी और उन्हें मिलने वाले विज्ञापन बंद या कम हो जाएंगे। कोई भी न्यूज चैनल विज्ञापनों के बल पर ही चलता है। फिर टी.आर.पी के पर्दे के पीछे चल रहे खेल की जानकारी आई और यह भ्रम टूट गया। सरकार से ऐसे दंगाई चैनलों के ख़िलाफ़ किसी तरह की कार्रवाई की उम्मीद किसी को नहीं।

ऐसे निराशाजनक माहौल में पार्ले और बजाज जैसी कंपनियों ने नफ़रत फैलाने वाले न्यूज चैनलों को कोई भी विज्ञापन नहीं देने का फैसला कर हम सबको राह दिखाई है। पार्ले और बजाज को हमारा सलाम ! उम्मीद है कि यह सिलसिला आगे बढ़ेगा। अब हमारी बारी है। सांप्रदायिकता से लड़ने में हमारी भूमिका सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होने वाली है। हमें पता है कि कौन-कौन न्यूज चैनल हमारे दिमाग और समाज में जहर घोल रहे हैं। हम इतना ही करें कि उन ज़हरीले न्यूज चैनलों पर जिन उत्पादों के विज्ञापन आ रहे हैं, उनकी सूची बना लें और आज से ही उन उत्पादों का वहिष्कार शुरू कर दें। यक़ीन मानिए, कुछ ही अरसे में ये दलाल चैनल या तो अपना एजेंडा बदलने को बाध्य होंगे या विज्ञापनों के बिना तड़प-तड़प कर दम तोड़ देंगे।
(लेखक पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं)

From around the web