बढ़ती महंगाई पर फिर पड़ सकती है Middle Class को मार, Festival सीजन में RBI ले सकता है बड़ा फैसला

डंके की चोट पर 'सिर्फ सच'

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बढ़ती महंगाई पर फिर पड़ सकती है Middle Class को मार, Festival सीजन में RBI ले सकता है बड़ा फैसला

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भारत के बाद अमेरिका में भी खुदरा महंगाई दर के आंकड़े सामने आए हैं। महंगाई दोनों देशों के लिए चिंता का विषय बन गई है। इसका असर दोनों देशों में देखने को मिलेगा। यूएस फेड के साथ RBI से ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद है, जिसका असर ईएमआई का भुगतान करने वाले बैंक ग्राहकों पर पड़ेगा।

इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन पहले से ज्यादा महंगे हो जाएंगे। अगर आपके पास पहले से लोन पर घर है, तो आपको ज्यादा ईएमआई देनी होगी।

महंगाई की मार

अमेरिका में रिकॉर्ड स्तर पर चल रही महंगाई दर के चलते इसका असर अमेरिकी शेयर बाजार के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल रहा है. भारत में 12 सितंबर को जारी अगस्त महीने के खुदरा महंगाई के आंकड़े बढ़कर 7 फीसदी हो गए हैं. जुलाई में यह 6.7 फीसदी था।

पिछले तीन महीने से खुदरामहंगाई दर में गिरावट आई है। पिछले साल यह आंकड़ा 5.3 फीसदी था। उधर, अमेरिका में भी मंगलवार को सीपीआई के आंकड़े जारी किए गए। इसके मुताबिक अगस्त में मासिक सीपीआई में 8.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। यहां जून में 40 साल में सबसे ज्यादा महंगाई दर 9.1 फीसदी दर्ज की गई है.


ब्याज दरों में वृद्धि निश्चित मानी जाती है

अमेरिका के ताजा सीपीआई आंकड़ों से यूसी फेड रिजर्व से ब्याज दर में 0.75 फीसदी की बढ़ोतरी मानी जा रही है। फेड अगले सप्ताह 21 सितंबर को अपनी बैठक में ब्याज दरों में बदलाव की घोषणा करेगा। यूएस फेड ने इस साल चार बार ब्याज दरों में बदलाव की घोषणा की है।

बता दें कि किसी भी देश में मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए उस देश का केंद्रीय बैंक ब्याज दर में वृद्धि करता है। भारत में भी मई से अब तक ब्याज दरों में तीन बार बढ़ोतरी की जा चुकी है।

नीतिगत दरों में लगातार तीन बढ़ोतरी

दूसरी ओर, मुद्रास्फीति में वृद्धि के कारण भारतीय रिजर्व बैंक इस महीने पेश होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर बढ़ा सकता है। सरकार ने RBI को खुदरा महंगाई दर को 2 फीसदी के मार्जिन के साथ 4 फीसदी पर रखने का आदेश दिया है। रिजर्व बैंक गवर्नर की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति समिति की बैठक 28-30 सितंबर तक होगी।


नीतिगत दर में लगातार तीन बार 1.40 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इकरा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि खुदरा मुद्रास्फीति में मासिक आधार पर वृद्धि का मुख्य कारण खाद्य कीमतों में वृद्धि है। यह अनुमान है कि सितंबर 2022 की मौद्रिक नीति समीक्षा में एमपीसी में 0.5 प्रतिशत की वृद्धि होगी।