Tax Saving Tips : ये स्कीम देगी डबल फायदा, कमाई के साथ साथ मिलेगा तीन गुना टैक्स लाभ

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Tax Saving Tips : ये स्कीम देगी डबल फायदा, कमाई के साथ साथ मिलेगा तीन गुना टैक्स लाभ

Tax Saving Tips


नई दिल्ली: नया साल आते ही आप अपनी कमाई पर टैक्स बचाने की कवायद में जुट जाएंगे क्योंकि वित्त वर्ष 2023-24 खत्म होने में सिर्फ एक दिन का वक्त बचा है और इस वित्त वर्ष के दौरान हुई इनकम पर आयकर तो देना ही होगा। टैक्स की प्लानिंग आपको अभी से ही करनी होगी, ताकि आपकी कमाई का बड़ा हिस्सा टैक्स चुकाने में न चला जाए।

टैक्स सेविंग के लिए आप इन योजनाओं में निवेश कर सकते हैं। इसमें पीपीएफ (Public Provident Fund), नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY), सीनियर सिटिजंस सेविंग स्कीम्स (SCSS) और इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) शामिल हैं, जो आपको जोखिम रहित निवेश के साथ टैक्स में छूट भी देती हैं।

इसके अलावा, आप 5 साल की एफडी में भी निवेश कर सकते हैं। इन सभी स्कीम और इन्वेस्टमेंट ऑप्शन में टैक्स बेनिफिट का लाभ मिलता है। पीपीएफ खाता खोलकर पाएं तीन गुना टैक्स लाभआप अपना एक पीपीएफ खाता भी खोल सकते हैं, जिस पर अभी 7.1 फीसदी सालाना ब्याज दर है।

पीपीएफ स्कीम आपको तीन गुना टैक्स लाभ देती है, क्योंकि आयकर एक्ट की धारा 80C के अनुसार योजना में अधिकतम 1.5 लाख रुपए का योगदान किया जा सकता है। पीपीएफ में मैच्योरिटी की रकम पर भी टैक्स से छूट मिलती है।

मैच्योरिटी पीरियड 15 साल है, जिसे 5-5 सालों के लिए आगे बढ़ा सकते हैं। आप इस स्कीम से 7 साल बाद आंशिक निकासी कर सकते हैं और 4 साल बाद इस पर लोन भी ले सकते हैं।

राष्ट्रीय पेंशन योजना में खाता खोलें और टैक्स से छूट पाएं

राष्ट्रीय पेंशन योजना यानी NPS में किए गए निवेश पर आपको धारा 80सी के तहत मिलने वाली छूट के अलावा 50,000 रुपए की छूट (इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80CCD1B) मिल सकती है।

अगर आपके पास पर्याप्त रकम है तो इस योजना में निवेश जरूर करें। इससे न केवल आप हर साल किए गए निवेश पर इनकम टैक्स बचा सकेंगे, बल्कि रिटायरमेंट के बाद आपको पेंशन का सुख भी मिलेगा।

ELSS से 1.5 लाख तक की टैक्स बचत

ELSS म्यूचुअल फंड एक ऐसा विकल्प है, जिसके तहत सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपए तक की टैक्स सेविंग कर सकते हैं। साथ ही इससे निवेशकों की अच्छी इनकम भी हो सकती है। हालांकि आपको इसके रिस्क को समझकर ही पैसा लगाना चाहिए।

सुकन्या समृद्धि योजना से मिलेगी टैक्स में छूट

सुकन्या योजना बेटियों के लिए है। इस स्कीम में 10 साल से कम उम्र की बच्ची के नाम से अकाउंट खोला जा सकता है। इसे अधिकतम दो बेटियों के लिए खोला जा सकता है। 18 साल की होने के बाद बेटी को खाते का स्वामित्व मिल जाता है।

इस योजना पर दी जा रही मौजूदा ब्याज दर 7.6 फीसदी है। योजना में शामिल होने के लिए न्यूनतम 250 रुपए से शुरू किया जा सकता है, जबकि सालाना अधिकतम 1.5 लाख रुपए तक जमा किए जा सकते हैं।

इसे भी सेक्शन 80C में छूट की श्रेणी में रखा गया है। इसमें भी 1.5 लाख रुपए तक टैक्स सेविंग की जा सकती है।

वरिष्ठ नागरिक बचत योजना में निवेश से पाएं टैक्स बेनिफिट

वरिष्ठ नागरिक बचत योजना में 60 साल या उससे अधिक उम्र का कोई भी रिटायर्ड व्यक्ति निवेश कर सकता है।

इसकी निवेश अवधि अधिकतम 5 साल है। इस योजना में न्यूनतम निवेश सीमा 1,000 रुपए और अधिकतम निवेश सीमा 15 लाख रुपए है।

मैच्योरिटी पीरियड के बाद इसे तीन साल के लिए बढ़ाया भी जा सकता है। सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम पर केंद्र सरकार प्रति वर्ष 8 फीसदी ब्याज दर दे रही है।

अकाउंट होल्डर्स आईटीआर फाइल करते हुए सेक्शन 80C के तहत टैक्स में छूट मांग सकते हैं।

नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट से 80 सी के तहत छूट

यह स्कीम छोटी-छोटी बचत काे ध्यान में रखकर शुरू की गई थी। इसमें आपको एक बार में निवेश करना होता है। आपको मैच्योरिटी के बाद प्रिंसिपल और इंटरेस्ट अमाउंट मिल जाता है। इसका टेन्योर 5 साल का है।

इसमें निवेश की न्यूनतम सीमा 1,000 रुपए है। मैच्योरिटी पर कुल ब्याज टैक्सेबल होता है, लेकिन सालाना इंटेरस्ट पहले चार साल में स्कीम में ही रीइन्वेस्ट हो जाता है। ऐसे में इसे अलग निवेश के तौर पर देखा जाता है और 80C के तहत टैक्स से छूट भी मिल जाती है।

पोस्ट ऑफिस टर्म डिपॉजिट स्कीम

पोस्ट ऑफिस टर्म डिपॉजिट स्कीम कुछ-कुछ बैंक के फिक्स डिपॉजिट जैसी होती है। इसमें 1, 2, 3 और 5 सालों के लिए निवेश किया जा सकता है। हालांकि, इसके ब्याज पर आपको 80C के तहत तभी टैक्स छूट मिलती है, जब डिपॉजिट पांच सालों का हो।

अलग-अलग टेन्योर पर अलग-अलग इंटरेस्ट रेट लागू होता है। इसमें मिनिमम इन्वेस्टमेंट अमाउंट 1,000 रुपए है और इस पर मैक्सिमम लिमिट जैसी कोई सीमा नहीं है। आपको टैक्स बेनेफिट 1.5 लाख पर ही मिलता है।

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80सी के तहत बचत करें

इन्कम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत कुल 1.5 लाख रुपए तक पर टैक्स रिबेट ली जा सकती है। इसके तहत आप नीचे दी गई चीजों में इंवेस्ट कर सकते हैं

  • तनख्वाह में से कटने वाला आपका प्रॉविडेंट फंड
  • 80CCC के तहत पेंशन फंड में जमा कराई गई राशि
  • जीवन बीमा पॉलिसी का जमा करवाया प्रीमियम
  • NSC में किया गया निवेश
  • पुराने NSC का Accrued ब्याज
  • PPF में किया गया निवेश
  • यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP)
  • बच्चों की ट्यूशन फीस
  • 5 साल से अधिक अवधि के फिक्स डिपॉजिट
  • इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम
  • होम लोन पर चुकाया गया इंटरेस्ट

सुकन्या समृद्धि योजना में किया गया निवेश

यानी ऊपर दी गई इन सारी योजनाओं में निवेश की गई रकम में से 1.5 लाख रुपए तक की रकम आपकी टैक्सेबल इनकम में से घटा दी जाती है।

80TTA के तहत बैंकों में बचत खातों पर मिलती है छूट

आपको यह जानना चाहिए कि बैंकों के बचत खातों में जमा रकम पर मिला ब्याज भी टैक्सेबल होता है और उस पर भी इनकम टैक्स देना पड़ता है। हालांकि, इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80टीटीए के तहत आपको बचत खाते में जमा रकम पर मिलने वाले 10,000 रुपए तक के ब्याज पर टैक्स में छूट मिलती है।

यानी जो भी ब्याज आपको बचत खाते से मिलता है, उसमें से 10,000 रुपए की रकम पर आप टैक्स में छूट हासिल कर सकते हैं। फिक्स डिपॉजिट या रिकरिंग डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज टैक्स फ्री नहीं होता है।

होम लोन पर चुकाया ब्याज या मकान किराए भत्ते (HRA) पर हासिल छूट

होम लोन लेने वालों को EMI में बैंक को दी गई ब्याज की रकम में से 2 लाख रुपए सालाना तक की रकम पर टैक्स से छूट मिल सकती है। यानी आप अपनी कुल EMI में जितना ब्याज दे रहे हैं, उसमें से 2 लाख रुपए की रकम टैक्स फ्री है। वहीं जो लोग किराये के मकान में रहते हैं, वे भी मकान किराये की रसीद देकर इनकम टैक्स में छूट पा सकते हैं।

हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर पाएं छूट

अगर आप 60 वर्ष से कम आयु के हैं और अपने लिए, जीवनसाथी के लिए या आश्रित बच्चों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम चुका रहे हैं, तो आपको 25,000 रुपए तक की रकम पर इनकम टैक्स में छूट मिल सकती है।

वहीं, अगर आपके माता-पिता की आयु 60 वर्ष से अधिक है और आप उनके लिए भी प्रीमियम चुका रहे हैं, तो 50,000 रुपए तक की अतिरिक्त छूट आप पा सकते हैं।

एजुकेशन लोन के ब्याज पर भी मिलेगी छूट

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80ई के तहत अगर आपने बच्चों की हायर एजुकेशन के लिए लोन लिया है तो उस पर चुकाए गए ब्याज को टैक्सेबल इनकम में से घटा दिया जाता है। इस धारा यानी सेक्शन के तहत चुकाए गए ब्याज की समूची रकम को करमुक्त यानी टैक्स फ़्री माना जाता है।

ध्यान रहे, ब्याज की रकम सिर्फ अधिकतम 8 साल तक के लिए ही करमुक्त होती है। अगर आप लोन 8 साल से ज़्यादा अवधि में चुकाते हैं तो 8 साल के बाद चुकाए गए ब्याज पर आपको टैक्स में छूट नहीं मिलेगी।