जान बचाने के लिए इंदिरा गांधी को चढ़ाया गया था 80 बोतल खून

 

इंदिरा गांधी देश की पहली महिला प्रधान मंत्री थीं और उन्होंने देश के हित में कई फैसले लिए और कई ऐसे फैसले भी लिए, किनसे लोग उनके मुखालिफ हो गए।  आपातकाल उन निर्णयों में से एक है।

31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या उनके ही सिख बॉडीगार्ड्स बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने की थी।  रूटीन चेकअप के लिए डॉक्टर से मिली इसके बाद पीटर उस्तिनोव को इंटरव्‍यू देना था। जिसमे वे अच्छी दिखना चाहती थी इसलिए उन्होंने बुलेटप्रूफ जैकेट भी नहीं पहनी।

सुबह 9.12 बजे सरकारी आवास 1 सफदरजंग रोड से निकल रही थीं। तभी उनके बॉडीगार्ड ने उन पर गोलियों की बौछार करना शुरू कर दिया। 

उन्हें एम्स हॉस्पिटल ले जाया गया। कार बहुत तेजी से एम्स की तरफ बढ़ी। वरिष्ठ कार्डियॉलॉजिस्ट को इसकी सूचना दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंदिरा की धड़कन में मामूली हलचल दिखाई दे रही थी। उनकी आंखों की पुतलियां फैली हुई थीं, जिस से पता चल रहा था कि उनके दिमाग को क्षति पहुंची है।

इंदिरा के उनके मुंह के जरिए उनकी साँस की नली में एक ट्यूब घुसाई ताकि फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंच सके । इंदिरा को 80 बोतल खून चढ़ाया गया लेकिन उनकी जान नहीं बच पाई।

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