ब्रह्माकुमारीज ने मनाया मातेश्वरी जगदंबा का 57 वां पुण्य स्मृति दिवस

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ब्रह्माकुमारीज ने मनाया मातेश्वरी जगदंबा का 57 वां पुण्य स्मृति दिवस


ब्रह्माकुमारीज ने मनाया मातेश्वरी जगदंबा का 57 वां पुण्य स्मृति दिवस


धौलपुर, 23 जून (हि.स.)। प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्वविद्यालय के तत्वावधान में धौलपुर और बाडी केन्द्रों पर गुरूवार को मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा का 57 वां स्मृति दिवस मनाया गया। इस मौके पर बीके भाई बहिनों ने मां जगदंबा को पुष्पाजंलि अर्पित कर उनका भावपूर्ण स्मरण किया।

बाडी केन्द्र पर राजयोगिनी बीके अंबिका बहिन ने कहा कि मां जगदंबा ने अल्पायु में ही तीव्र पुरुषार्थ दो बातों को सामने रख किया- हुक्मी हुक्म चला रहा है, जीवन की हर घड़ी अंतिम खड़ी है। जिससे ही वह 24 जून 1965 को मानव जीवन की संपूर्णता को प्राप्त कर इस देह से न्यारी हुई। जिनकी शिक्षाओं को विश्व भर के ब्रह्मा वत्स जीवन में उतारने के लिए आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में मनाते हैं। धौलपुर केन्द्र पर आयोजित कार्यक्रम में बीके प्रियंका बहिन ने मातेश्वरी जगदंबा जी के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सन् 1936 में मातेश्वरी जी 16 वर्ष की आयु में इस महान यज्ञ में आई, जो प्रथम ब्रम्हाकुमारी थी। आपको सभी प्यार से मम्मा कहकर बुलाते थे। परमात्मा ने ज्ञान का कलश उनके सिर पर रखकर सारे यज्ञ की बागडोर उनके हाथों में सौंप दी। बीके सुलेखा बहिन ने मम्मा की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा- कि मम्मा ममता की मूरत थीं और सभी यज्ञ-वत्सों का मां की तरह पालन-पोषण करती थीं। उनके मातृत्व भाव से प्रेरित होकर हजारों कन्याओं ने अपना जीवन ईश्वरीय सेवा में समर्पित कर दिया।

हिन्दुस्थान समाचार/ प्रदीप/ ईश्वर