पंचायत विभाग का दुस्साहस : भवन हैं जर्जर, बदबू से विषाक्त

 
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विनोद मिश्रा
बांदा।
पंचायत बिभाग में भी दुस्साहस की आश्चर्य जनक हद हो गई है।  गावों के अधिकांश सचिवालय जर्जर और गंध मार रहें हैं। शासन को रिपोर्ट में सब चकाचक है।सरकारी योजनाओं व विकास कार्यो के प्रति अधिकारी व कर्मचारी कितने सक्रिय हैं उनके विभाग से संचालित कार्यो व व योजनाओं की प्रगति से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। 

चित्रकूट धाम मंडल में अभी भी कई ऐसी ग्राम पंचायतें हैं जहां के पंचायत भवन जर्जर हालत में हैं। इन्हें संवारकर विस्तारित करने को का काम पिछले करीब एक साल से ज्यादा समय से चल रहा है। लेकिन इसमें मंडल के तीन जिलों की प्रगति बेहद खराब होने पर डीडी ने कड़़ी नाराजगी जताते हुए 20 अक्टूबर तक कार्य पर्ण करने की मोहलत दी है।

मंडल की सभी 1403 ग्राम पंचायतों में पंचायत भवनों व कार्यालयों की सुविधा ग्रामीणों को मिलेगी। गांव के कार्यालय में रोस्टर के हिसाब से क्षेत्रीय व ग्राम पंचायत स्तरीय कर्मचारी बैठकर लोगो की समस्याओं को सुनने साथ ही उनका निस्तारण करेंगे। करीब पिछले एक साल से चल से यह कवायद चल रही है, लेकिन अभी भी मंडल के बांदा, हमीरपुर व चित्रकूट इस मामलें में फिसड्डी हैं। जबकि इन्हीं पंचायत भवनों में संचालित होने वाले कार्यालयों से ग्राम पंचायत स्तर के ज्यादातर कार्यो, सरकारी योजनाओं का लाभ पात्रों को दिलाने व विकास कार्यो को क्रियान्वित कराया जाना है। जहां अभी पंचायत भवन जर्जर हालत में हैं। वहां यह कार्य गति नहीं पकड़ पाया। विभाग का कहना है कि खराब प्रगति वाले इन तीन जिलों की विभागीय पोर्टल पर पंचायत भवन व ग्राम पंचायत सचिवालयों की अपलोड फोटो से पता चल रहा है कि बिना मरम्मत कराए ही खंडहर पंचायत भवनों की फोटो अपलोड कर दी गई है। जो आपत्तिजनक है।

उप निदेशक पंचायत ने जिला पंचायत राज अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि खंडहर पड़े पंचायत भवनों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करा लिया जाए। जो भी संबधित सचिव इसमें लापरवाही करें उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी स्पष्टीकरण लें। संतोष जनक जवाब न मिलने पर कार्यवाही करें।

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