DM रहें सचेत, सिंचाई विभाग सिल्ट सफाई पर करने जा रहा खेल!

 
विनोद मिश्रा
बांदा।
नहरों की सफाई के नाम पर सरकारी धन की सफाई की पूरी रणनीति सिचाई विभाग नें बना ली है। डीएम आनन्द कुमार सिंह के साथ ही कमिश्नर गौरव दयाल को भी इस ओर अपनी सतर्क नजरें घुमानी होगी। डीएम साहब को यह बताना जरूरी हो गया है की चित्रकूटधाम मंडल की नहरों में सफाई के नाम पर एक बार फिर कई करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी है। सिंचाई विभाग ने चारों जनपदों की 236 माइनरों की सफाई का लक्ष्य चालू वर्ष 2021 में तय किया है। मंडल मुख्यालय बांदा में 145 माइनर की सफाई पर 1.52 करोड़ रुपये खर्च होंगे। आश्चर्य की बात यह है की सिंचाई विभाग इसी महीनें सिल्ट सफाई का काम पूरा करने का दावा कर रहा है जबकि अधिकांश नहरें अभी संचालित हो रही हैं।
बांदा डीएम सहित कमिश्नर साहब भी समझ लें की मंडल के चारों जनपदों में नहर और बड़ी संख्या में माइनर हैं। इनकी कुल लंबाई 982.663 किलोमीटर है। इनमें अवैध कटान और सिल्ट पर मलबा जमा होने पर अंतिम हिस्से तक पानी नहीं पहुंच पाता। सिंचाई विभाग हर साल नहरों की सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च भी करता है। इस वर्ष भी रबी 1428 फसली (2020-21) में चारों जिलों की 236 माइनर की सफाई का लक्ष्य निर्धारित किया है।
बांदा जनपद में 145 माइनरों की सफाई कराई जा रही है। अधिशासी अभियंता (केन नहर प्रखंड) केके पांडेय ने बताया कि 30 नवंबर तक सभी माइनरों की सिल्ट साफ करा दी जाएगी। लगभग 595 मजदूर लगे हैं। इसके लिए शासन से एक करोड़ 52 लाख 80 हजार रुपये मिले हैं। लेकिन फिलहाल नहर चल रही है। 14 नवंबर से यह बंद हो जाएगी। इसी के बाद काम शुरू होगा। सफाई कार्य के लिए टेंडर लिए गए हैं। बांदा जनपद में कुल 965 किलोमीटर लंबी नहरें हैं।
चित्रकूटधाम मंडल के सभी लगभग 13 बांधों में पानी के भंडार की स्थिति बेहतर नहीं है। बरसात के मौसम में कोई भी बांध पूरी क्षमता से नहीं भर पाया। अधिकांश में क्षमता से भी कम जल भंडारण हैं। बारिश का मौसम बीत जाने के बाद सिंचाई विभाग ने बांधों के गेट खड़े कर दिए हैं ताकि पानी का स्टॉक किया जा सके।
बांदा जनपद को पानी देने वाले गंगऊ वियर 19 फीसदी, रनगवां 39 फीसदी और बरियारपुर 29 फीसदी भर पाया है। चित्रकूट में ओहन बांध व बरुआ बांध 18-18 प्रतिशत, गुंता बांध 73 प्रतिशत और रसिन बांध 80 प्रतिशत भरे हैं।
महोबा में अर्जुन बांध 82 और चंद्रावल बांध 66 प्रतिशत भरा है। मझगवां बांध में 10 फीसदी और उर्मिल बांध 12 फीसदी भरे बताए गए हैं। इन बांधों में उपलब्ध पानी उपयोगी पानी की क्षमता की स्थिति भी गंभीर है। बांदा के सिंचाई विभाग ने गंगऊ और बरियारपुर बांधों के गेट खड़े कर दिए हैं। इन्हें 15 जून को गिरा दिया गया था। अब गेट खड़े करके पानी रोका जा रहा है।इस संदर्भ में उम्मीद है की जिलाधिकारी आनन्द कुमार सिंह की सतर्कता बांदा में सिंचाई विभाग कीयोजना पर कड़ी समीक्षात्मक नजर रखेंगे ताकि नहरों की सफाई पर पूर्ण रूप से संभावित भ्रष्टाचार रुक सके!

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