Dr Namita Mishra ने बच्चे को दी नई जिंदगी! इस खतरनाक बीमारी का इलाज करके बन गईं 'भगवान'
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उत्तर प्रदेश के रायबरेली स्थित AIIMS में एक 8 वर्षीय बच्चे का इलाज करके डॉ. नमिता मिश्रा और उनकी टीम ने न केवल चिकित्सा क्षेत्र में एक मिसाल कायम की, बल्कि परिवार के लिए 'भगवान' बन गईं। यह बच्चा गुलिन-बैरी सिंड्रोम नामक खतरनाक बीमारी से पीड़ित था, जो तंत्रिका तंत्र को पूरी तरह से प्रभावित कर देती है। इस बीमारी में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपने ही तंत्रिका तंतुओं पर हमला बोल देती है, जिससे मांसपेशियों में कमजोरी और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है।
बीमारी की गंभीरता और इलाज की चुनौतियां
गुलिन-बैरी सिंड्रोम एक दुर्लभ और जानलेवा बीमारी है, जो आमतौर पर वायरल संक्रमण के बाद होती है। इस बीमारी में मरीज की मांसपेशियों में तेजी से कमजोरी आती है, और अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह सांस लेने की प्रक्रिया को पूरी तरह से बंद कर सकती है। AIIMS रायबरेली के डॉक्टरों ने बताया कि इस बच्चे की हालत बेहद गंभीर थी। उसके शरीर के अधिकांश हिस्से में मांसपेशियों की ताकत खत्म हो चुकी थी, और वह सांस लेने के लिए वेंटिलेटर पर निर्भर था।
डॉ. नमिता मिश्रा की टीम ने कैसे किया इलाज?
इस बच्चे का इलाज करने के लिए AIIMS के विभिन्न विभागों ने मिलकर काम किया। डॉ. नमिता मिश्रा ने ट्रांसम्यूटेशन मेडिसिन, ईएनटी, पीडियाट्रिक सर्जरी, पीएमआर और रेडियोलॉजी विभागों के साथ मिलकर एक योजना तैयार की। उन्होंने बताया कि इस बीमारी के इलाज में इम्यूनोग्लोबुलिन थेरेपी (IVIG) और प्लाज्मा एक्सचेंज जैसी जटिल प्रक्रियाओं का उपयोग किया गया। इसके अलावा, बच्चे को ऑक्सीजन सप्लाई और पोषण देने के लिए विशेष उपकरणों का सहारा लिया गया।
परिवार की भावनाएं: "डॉ. नमिता ने हमारे बच्चे को दिया दूसरा जन्म"
बच्चे के परिवार ने डॉ. नमिता मिश्रा और उनकी टीम के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। बच्चे की मां ने कहा, "हमने सोचा था कि हमारा बेटा कभी नहीं चल-फिर पाएगा, लेकिन डॉ. नमिता जी ने हमारी उम्मीदों को सच बना दिया। वह हमारे लिए भगवान की तरह हैं।" बच्चे के पिता ने भी कहा, *"जब हमारे बच्चे को वेंटिलेटर से हटाया गया, तो हमें लगा जैसे हमने दूसरी बार पितृत्व का आनंद प्राप्त किया है।"
डॉ. नमिता मिश्रा की विशेषज्ञता और अनुभव
डॉ. नमिता मिश्रा पीडियाट्रिक्स के क्षेत्र में एक अनुभवी डॉक्टर हैं। उनके पास गंभीर बीमारियों के इलाज का लंबा अनुभव है। AIIMS रायबरेली में उनकी टीम ने न केवल इस बच्चे का इलाज किया, बल्कि उन्होंने अन्य जटिल मामलों में भी सफलता हासिल की है। डॉ. मिश्रा का मानना है कि "चिकित्सा क्षेत्र में टीमवर्क और नवीनतम तकनीक का सही उपयोग ही मरीजों की जिंदगी बचा सकता है।"
इस इलाज से मिली सीख: स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता
यह मामला हमें यह सिखाता है कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है। गुलिन-बैरी सिंड्रोम जैसी बीमारियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और त्वरित इलाज की सुविधा प्रदान करने से ही ऐसे मामलों को नियंत्रित किया जा सकता है। डॉ. नमिता मिश्रा ने कहा, "हमें मरीजों को समय पर सही इलाज देने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।"