शासन भी कर लेता है अच्छा मजाक: सफाई नीति दर्शाती है यह बात!

 
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विनोद मिश्रा
बांदा।
शासन भी अच्छा मजाक करने में माहिर है। शहरों, कस्बों में तो प्लास्टिक कचरा साफ नहीं कर पाई अब गावों से प्लास्टिक कचरा हटायेगे।47 लाख का बजट खुर्द-बुर्द होगा! भगवान ही मालिक हैं ऐसी नीतियों का।
क्योकि गांवों में प्लास्टिक व पालीथिन के कचरे से निपटने के इंतजाम में करीब 47 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके लिए ग्राम पंचायतों में दस- दस हजार की लागत से कलेक्शन सेंटर  का निर्माण कराया जाएगा।
गांवों की स्वच्छता पर सरकार का विशेष जोर है। गलियों व घरों से निकलने वाले कचरे व जल भराव की समस्या से निपटने को खाद व सोख्ता गड्ढ़ों का निर्माण कराया जा रहा है। पालीथिन व प्लास्टिक का कचरा भी एक बड़ी समस्या है। अब इसके प्रबंधन की भी कवायद शुरू है। पंचायती राज विभाग जिले की सभी ग्राम पंचायतों में एक-एक कलेक्शन सेंटर बनाने जा रहा है। जिसमें गांवों में निकलने वाले पालीथिन व प्लास्टिक के कचरे को निस्तारित किया जाएगा। विभाग का कहना है कि इसे बनाने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को दी गई है। जिसे राज्य वित्त आयोग, अनटाइड फंड से बनाया जाएगा। जिले की सभी 469 ग्राम पंचायतों में इन्हें बनाया जाएगा। इस कार्य में लगभग 46 लाख 90 हजार रूपये खर्च होंगे।
 

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