ताजमहल में शिवलिंग की स्थापना! मीरा राठौर ने गंगाजल से किया जलाभिषेक, वीडियो वायरल होने से मचा बवाल
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महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर ताजमहल में एक अनोखी घटना घटी। अखिल भारत हिंदू महासभा की महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष मीरा राठौर ने ताजमहल के अंदर शिवलिंग स्थापित कर गंगाजल से जलाभिषेक किया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही राजनीतिक और धार्मिक विवादों का केंद्र बन गया।
मीरा राठौर का राजनीतिक सफर और ताजमहल से जुड़ा पुराना विवाद
मीरा राठौर का नाम पहले भी ताजमहल से जुड़े विवादों में सुना गया है। पिछले साल सावन के महीने में उन्हें ताजमहल में भगवा झंडा फहराने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया था। इस बार उन्होंने महाशिवरात्रि के मौके पर ताजमहल को 'तेजोमहालय' बताते हुए शिवलिंग की स्थापना की। उनका दावा है कि यह स्थल मूल रूप से एक हिंदू मंदिर था, जिसे मुगल बादशाह शाहजहाँ ने ताजमहल में बदल दिया।
घटना का विस्तृत विवरण: शिवलिंग और गंगाजल का जलाभिषेक
महाशिवरात्रि के दिन मीरा राठौर ने सुबह 10 बजे ताजमहल के अंदर प्रवेश किया। उनके साथ कुछ समर्थक भी थे, जिन्होंने शिवलिंग को स्थापित किया। उन्होंने संगम प्रयागराज से लाए गए गंगाजल से जलाभिषेक किया और धूपबत्ती जलाकर पूजा अर्चना की। इस दौरान 'बम-बम भोले' के जयकारे लगाए गए। वीडियो में देखा जा सकता है कि वह शिवलिंग के सामने खड़ी होकर भजन गाती हैं और समर्थकों के साथ मिलकर पूजा करती हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद का बवाल
इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दो पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। एक ओर हिंदू संगठनों ने इसे 'तेजोमहालय' की पवित्रता बहाल करने का प्रयास बताया, तो दूसरी ओर सांस्कृतिक संगठनों ने इसे सांस्कृतिक विरासत के साथ खिलवाड़ करार दिया। कुछ यूजर्स ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए, जबकि अन्य ने इसे धार्मिक भावनाओं का सम्मान बताया।
ताजमहल के बारे में ऐतिहासिक दावे और विवाद
मीरा राठौर का कहना है कि ताजमहल मूल रूप से 'तेजोमहालय' नाम का एक हिंदू मंदिर था। उनके अनुसार, यह स्थल भगवान शिव को समर्पित था, जिसे बाद में मुगलों ने कब्रिस्तान में बदल दिया। यह दावा इतिहासकारों और पुरातत्व विभाग के बीच विवादित रहा है। कुछ हिंदू संगठनों ने इसे 'हिंदू विरासत' के पुनरुद्धार का प्रयास बताया, जबकि अन्य ने इसे सांस्कृतिक संवाद के खिलाफ बताया।